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गंगा मां की कसम खा कहें भाजपा नेता, उन्होंने कांग्रेस विधायकों को घूस की पेशकश नहीं की

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 28, 2016 09:30 pm IST,  Updated : Apr 28, 2016 09:30 pm IST

घूस की पेशकश किए जाने के आरोपों का भाजपा द्वारा सबूत मांगे जाने पर टिप्पणी करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भाजपा के नेता खुद गंगाजल हाथ में लेकर यह कसम खाएं कि उन्होंने ऐसा नहीं किया।

Harish Rawat
- India TV Hindi
Harish Rawat

देहरादून: कांग्रेसी विधायकों को वफादारी बदलने के लिए 50 करोड़ रुपए तक की घूस की पेशकश किए जाने के आरोपों का भाजपा द्वारा सबूत मांगे जाने पर टिप्पणी करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को कहा कि उनके नेता खुद गंगाजल हाथ में लेकर यह कसम खाएं कि उन्होंने ऐसा नहीं किया।

यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने कहा, भाजपा नेता हरिद्वार में हरकी-पैडी में गंगा जल हाथ में लेकर गंगा मैया की कसम खाकर कहें कि उनके नेताओं ने कांग्रेस विधायकों से सम्पर्क नही साधा है। नौ कांग्रेसी विधायकों के हरीश रावत सरकार के खिलाफ बागी हो जाने के बाद उत्तराखंड में मचे सियासी तुफान में भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रहे आरोप और प्रत्यारोप के दौर में 26 अप्रैल को दो कांग्रेसी विधायकों ने भाजपा पर 50 करोड रुपए तक की घूस देने का आरोप लगाया था।

बदरीनाथ के विधायक राजेंद्र भंडारी और थराली के विधायक जीतराम ने 26 अप्रैल को आरोप लगाया था कि उन्हें अपनी वफादारी भाजपा के पक्ष में बदलने के लिए पचास करोड़ रुपए तक देने, परिवार के एक सदस्य को विधानसभा का टिकट देने और राज्यसभा की एक सीट देने की पेशकश की गई थी। इसके जवाब में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि विधायक या तो अपने आरोपों के समर्थन में सबूत दें या इस मसले पर वे बिना शर्त माफी मांगें।

उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के मसले पर सुनवाई के लिए तीन मई की तारीख तय किए जाने के बारे में पूछे जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें न्यायलय पर भरोसा है परन्तु इस संबंध में निर्णय जितना जल्दी हो उतना उचित है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह बहुमत साबित करने अथवा नए चुनाव के लिए तैयार है, रावत ने कहा कि इस संबंध में संवैधानिक संस्थाओं द्वारा दिखाई जाने वाली लोकतांत्रिक राह को वह स्वीकार करेंगे।

रावत ने प्रदेश में सूखा ग्रस्त क्षेत्रों के सर्वे कार्य में केवल पांच जिलों को सूखाग्रस्त बताए जाने पर भी असंतोष व्यक्त किया और कहा कि प्रदेश के तमाम वर्षा आधारित व असिंचित भूमि को सूखाग्रस्त घोषित किया जाना चाहिए। देश के विभिन्न क्षेत्रों मे वर्तमान में गम्भीर सूखें की स्थिति के लिए भी उन्होंने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि पिले दो वर्षो में उसके स्तर पर जल प्रबन्धन पर कोई प्रभावी नीति न बनाया जाना इसका एक प्रमुख कारण है।

रावत ने कहा कि केन्द्र में जल संसाधन मंत्री होने के दौरान उन्होने बुन्देलखण्ड़ में केन व बेतवा नदी को लिंक करने के लिए योजना लगभग बना दी थी जिसे लागू किया जाना था। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार राज्य के चाल-खाल, गाद-गदेरों को भी पुर्नजीवित करने के लिए उन्होंने विभिन्न योजनायें लागू की थीं लेकिन केन्द्र से बजट न मिल पाने के कारण इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हो पाई।

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