महोबा: देश में जहां एक तरफ योग एक विवादास्पद विषय बना हुआ है वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में रमजान महीने में मुस्लिम भाइयों के साथ मिलकर कल से कुछ हिन्दू पूरे माह रोजा रहते हुए मुल्क में सद्भाव का संदेश देने का प्रयास करेंगे।
बुंदेली समाज संगठन के समन्यवक तारा पाटकर ने भाषा को बताया कि हम लोगों ने तय किया है कि शहर के उदल चौक पर लगभग 60 लोग मिलकर , जिसमें 25 हिन्दू शामिल है सुबह की सहरी और दिन भर रोजे के बाद शाम को इफ्तार आयोजित करेंगे।
उन्होंने बताया कि यह आयोजन करने से जहां एक तरफ पूरे मुल्क में हिन्दू मुस्लिम के बीच एक मजबूत सद्भाव का संदेश जायेगा वहीं दूसरी तरफ बुंदेलखंड के केन्द्र में बसे महोबा जिले में अखिल भारतीय आयुर्विग्यान संस्थान :एम्स: खोले जाने की काफी दिनों से चली आ रही मांग को लेकर भी प्रभावी दबाव बनाया जा सकेगा।
पाटकर ने कहा कि बुंदेलखंड के हिन्दू मुस्लिम तथा अन्य सभी धर्मों के लोगों को एक साथ मजबूत कड़ी बनाकर हमारा संगठन देश के नीति निर्धारकों को यह एहसास भी करायेगा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में गरीबों सहित आम जनों की गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए यहां एम्स खोला जाना कितना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि 21 जून को हो रहे अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर जहां देश में योग को लेकर ओछी राजनीति हो रही है, वहीं हमारे संगठन ने कल से शुरू होने वाले संयुक्त रोजा कार्यक्रम में सभी दलों के नेताओं को इसमें विशेष रूप से आमंत्रित किया है ताकि वह हमारे एकता के संदेश को समझ सकें और एम्स खोले जाने के मामले में भी प्रभावी भूमिका अदा करें।
पाटकर ने बताया कि हिन्दू मुस्लिम का संयुक्त रोजा कार्यकम महोबा में एम्स खोले जाने के अभियान का भी एक हिस्सा है और अब तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक लाख से ज्यादा पोस्टकार्ड 18 भाषाओं में लिखकर यहां एम्स खोले जाने का अनुरोध किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत मुस्लिम समाज के युवक और बच्चों ने संस्कृत में और हिन्दूओं ने उर्दू में तथा अन्य धर्म के लोगों ने सिंधी, पंजाबी और मलयालम भाषाओं में प्रधानमंत्री को अनुरोध पत्र भेजे हैं।
पाटकर ने बताया कि महोबा में एम्स खोले जाने को लेकर जिले के सभी प्रमुख स्थानों जैसे रेलवे, बस स्टेशन, चिकित्सालयों और स्कूलों में भी शिविर लगा कर एम्स खोले जाने की जरूरत पर ध्यान आकृष्ट किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बंदेलखंड क्षेत्र में आने वाले उत्तरप्रदेश के सात और मध्य प्रदेश के पांच जिलों के लोगों को गंभीर और सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए कानपुर, लखनउ और आगरा भेज दिया जाता है जिससे इस क्षेत्र के लोगों को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है।
पाटकर के अनुसार, महोबा में एम्स खोले जाने के अभियान का इंग्लैड, आस्ट्रेलिया , साउदी अरब में रहने वाले लोग भी पुरजोर समर्थन कर रहे हैं।