
मालिक और नौकर की बातचीत में भी कभी न पड़ें
कौटिल्य के नाम से जाने जाने वाले आचार्य चाणक्य ने कहा था कि जब कोई मालिक और उनका सेवक बातचीत कर रहे हों तो भी कभी उनके बीच में नहीं आना चाहिए। उनका मानना था कि दोनों के बीच का संवाद बाधित करने से वह कार्य अधूरा रह सकता है जिसे कोई स्वामी अपने सेवक से पूरा कराना चाहता है।