भोपाल: मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नौ मौतों की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी। इन मौतों को लेकर सवाल उठ रहे थे। इस तरह CBI अबतक कुल 14 मौतों की जांच अपने हाथ में ले चुकी है।
CBI व्यापमं मामले में 10 प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है। CBI सूत्रों के अनुसार, व्यापमं परीक्षाओं से जुड़े नौ लोगों की कुछ वर्षो के दौरान हुई मौत की प्रारंभिक जांच शनिवार को दर्ज की गई है। इन मामलों में पुलिस पर आरोप है कि उसने कोई कार्रवाई नहीं की है। CBI इस बात की जांच करेगी कि इन मौतों का व्यापमं घोटाले से क्या रिश्ता है।
इन नौ मौतों में आनंद सिंह, आशुतोष तिवारी, ज्ञान सिंह, अनंत राम टैगोर, रावेंद्र प्रताप सिंह, प्रेमलता पांडे, विकास पांडे, राजेंद्र आर्य और संजय कुमार यादव की मौत के मामले शामिल हैं।
इससे पहले CBI ने नम्रता डामोर, पत्रकार अक्षय सिंह, विजय पटेल, राजेंद्र आर्य और दीपक वर्मा की मौतों का ब्योरा संबंधित जिलों -उज्जैन, कांकेर, ग्वालियर, झाबुआ और इंदौर- के पुलिस अधीक्षकों से मांगा था।
CBI ने झाबुआ की नम्रता डामोर की मौत को शुक्रवार को हत्या मानते हुए प्रकरण दर्ज किया था, वहीं नम्रता की मौत को कवर कर रहे पत्रकार अक्षय सिंह की मौत को भी जांच के दायरे में ले लिया है।
उल्लेखनीय है कि व्यापमं घोटाले से जुड़े 48 लोगों की मौत चर्चा में रही है। इन मौतों में कई को संदिग्ध माना गया है।
ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने नौ जुलाई को व्यापमं की CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI अबतक 10 प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है।
अभी तक मामले की जांच कर रहे STF ने व्यापमं घोटाले में कुल 55 प्रकरण दर्ज किए गए थे। इसमें 2100 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, वहीं 491 आरोपी फरार हैं। जांच के दौरान 48 लोगों की मौत हो चुकी है। STF 1200 आरोपियों के चालान पेश कर चुका है।
मामले का खुलासा जुलाई 2013 में हुआ था। जांच का जिम्मा अगस्त 2013 में STF को सौंपा गया था। उच्च न्यायालय ने जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश चंद्रेश भूषण की अध्यक्षता में अप्रैल 2014 में STF बनाई। अब मामला CBI के पास है।