केरल में ओमान चांडी के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट इस बार सत्ता से महरूम हो सकती है। इस बार के चुनाव में यह सिर्फ 49 सीटें जीतती दिख रह है, जबकि इसने पांच साल पहले 72 सीटों पर कब्जा जमाया था। सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट इस बार 89 सीटें जीतता दिख रहा है और यह 140 सीटों वाली केरल विधानसभा सभा में एक स्पष्ट बहुमत है। आपको बता दें कि एलडीएफ ने पिछली बार 66 सीटें जीती थीं। वहीं इस राज्य में बीजेपी गठबंधन सिर्फ एक सीट पर ही जीत हासिल करता दिख रहा है। अगर वोट फीसदी की बात करें तो एलडीएफ 44.6 फीसदी वोट हासिल करता दिख रहा है जबकि यूडीएफ को 39.1 फीसदी वोट मिलने के आसार हैं।
तमिलनाडु में एआईएडीएमके पिछले बार के मुकाबले कमतर प्रदर्शन करती जान पड़ रही है। 234 सीटों की विधानसभा में डीएमके इस बार सिर्फ 116 सीटें जीतती दिख रही है जबकि उसने पिछली बार 203 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं करूणानिधि की डीएमके इस बार ज्यादा सीटें हासिल करती दिख रही है। डीएमके इस बार 101 सीटें जीत सकती है जबकि पिछली बार उसे सिर्फ 31 सीटें ही हासिल हुईं थीं। बीजेपी का यहां सूपड़ा साफ हो सकता है, वहीं अन्य के खाते में 17 सीटें जाती हुईं दिख रही हैं। अगर वोट फीसदी की बात की जाए तो एआईएडीएमके का वोट शेयर 41.1 फीसदी पर सिकुड़ सकता है जबकि पिछली बार उसे 51.9 फीसदी वोट हासिल हुए थे। वहीं दूसरी तरफ डीएमके गठबंधन इस बार भी 39.5 फीसदी के वोट शेयर पर बना रह सकता है। हालांकि बीजेपी का वोट इस बार पिछली बार के 2.2 फीसदी के मुकाबले इस बार 5 फीसदी तक जाता दिख रहा है।

अगर पूर्वोत्तर के राज्य असम की बात की जाए तो बीजेपी गठबंधन 126 सीटों वाली विधानसभा में 57 सीटों पर जीत हासिल करता हुआ दिख रहा है। मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की पार्टी कांग्रेस इस बार 44 सीटों पर सिमट सकती है जबकि उसे पिछली बार 78 सीटे हासिल हुई थीं। वहीं बदरूद्दीन अजमल की आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक एलाइंस 19 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। अन्य के खाते में भी 6 सीटें जा सकती हैं। सी वोटर्स ने यह स्पष्ट किया है कि यह सर्वे असम में बीजेपी और असम गण परिषद के साथ में चुनाव लड़ने की घोषणा से पहले किया गया है।