
इसमें आगे कहा गया है कि अपनी ओर से जिया भी द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के उपायों पर कुछ विचार रख सकते हैं। वह व्यापार, संचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करने वाले साझा आयोग के साथ ही दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय राजनयिक वार्ता का सुझाव दे सकते हैं।
दस्तावेज के मुताबिक ‘जिया भारतीय प्रधानमंत्री से इस बारे में विचार व्यक्त करने का आग्रह कर सकते हैं कि क्या सोवियत संघ अफगानिस्तान में स्थिति के समाधान के बारे में बातचीत को लेकर गंभीर हो रहा है।’
सीआईए की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘नई दिल्ली पाकिस्तान को वह स्थान मानता है जहां सोवियत संघ को आगे बढने से रोका जा सके (स्ट्रैटजिक बफर) और वह पाकिस्तान पर वर्चस्व स्थापित करने के मॉस्को के प्रयास का विरोध करेगा। नई दिल्ली और मॉस्को दोनों पाकिस्तान के भीतर परस्पर विरोधी समूहों का समर्थन कर सकते हैं।’
रिपोर्ट के अनुसार ‘उस स्थिति में भारतीय मॉस्को पर अपनी निर्भरता को काफी कम करना और सोवियत संघ के साथ रणनीतिक साझेदारी को फिर से व्यवस्थित करना चाहेंगे।’
इसमें कहा गया है कि सोवियत संघ ने पाकिस्तान के इरादों और अमेरिका के साथ उसके सुरक्षा संबंधों के बारे में भारत के संदेह को बढ़ाने का प्रयास किया ताकि भारत-पाकिस्तान तनाव को हवा दी जा सके और मॉस्को पर नई दिल्ली की निर्भरता को बढ़ाया जा सके।
रिपोर्ट कहती है, ‘सोवियत के विचार में, भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष मॉस्को की अफगान समस्या को हल करने की दिशा में काम करेगा और इससे मॉस्को को दक्षिण एशिया में अपनी स्थिति को मजबूत बनाने का मौका भी मिलेगा।’