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इशरत जहां केस में लापता फाइलों की जांच के लिए सरकार ने बनाई कमेटी

 Written By: Bhasha
 Published : Mar 14, 2016 09:29 pm IST,  Updated : Mar 14, 2016 09:31 pm IST

नई दिल्ली: अतिरिक्त सचिव बी के प्रसाद की एक सदस्यीय समिति कथित तौर पर इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले से जुड़ी लापता फाइलों की जांच करेगी। यह जानकारी आज सरकार ने दी। गृह मंत्रालय में

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नई दिल्ली: अतिरिक्त सचिव बी के प्रसाद की एक सदस्यीय समिति कथित तौर पर इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले से जुड़ी लापता फाइलों की जांच करेगी। यह जानकारी आज सरकार ने दी। गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव प्रसाद उन परिस्थितियों की जांच करेंगे जिसमें इशरत जहां मामले से जुड़ी फाइलें गायब हो गईं। गुजरात में 2004 में कथित फर्जी मुठभेड़ में इशरत जहां मारी गई थी।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि समिति फाइलों का रखरखाव करने और संबंधित मुद्दे से जुड़े लोगों का पता लगाएगी। गृह मंत्रालय से जो कागजात गायब हुए हैं उनमें अटॉर्नी जनरल की तरफ से तैयार हलफनामा और 2009 में गुजरात उच्च न्यायालय को सौंपा गया हलफनामा तथा एजी द्वारा तैयार दूसरा हलफनामा शामिल है जिसमें बदलाव किए गए थे।

तत्कालीन गृह सचिव जी के पिल्लै द्वारा तत्कालीन अटॉर्नी जनरल दिवंगत जी ई वाहनवती को लिखे गए दो पत्र तथा मसौदा हलफनामा की प्रति लापता है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दस मार्च को संसद में खुलासा किया था कि फाइल लापता हो गयी हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि पहला हलफनामा महाराष्ट्र और गुजरात पुलिस के अलावा खुफिया ब्यूरो की तरफ से दी गई जानकारी पर आधारित था जिसमें कहा गया था कि मुंबई के बाहरी इलाके की 19 वर्षीय लड़की लश्कर ए तैयबा की सदस्य है लेकिन दूसरे हलफनामे में इस जानकारी की अनदेखी की गई थी।

अधिकारियों ने कहा कि तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा तैयार दूसरे हलफनामे में दावा किया गया कि यह साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं हैं कि इशरत आतंकवादी थी। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लै ने हाल में दावा किया था कि गृह मंत्री के तौर पर चिदंबरम ने मूल हलफनामा दायर करने के एक महीने बाद फाइल को मंगवाया था। मूल हफनामे में इशरत और मारे गए सहयोगियों को लश्कर ए तैयबा का सदस्य बताया गया था। बाद में हलफनामा बदलवा दिया गया। इसके बाद चिदंबरम ने हलफनामे की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि पिल्लै भी हलफनामा बदलवाने में बराबर के जिम्मेदार थे।

अहमदाबाद में 15 जून 2004 को गुजरात पुलिस के साथ मुठभेड़ में इशरत, जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लै, अमजदअली अकबरअली राणा और जीशान जौहर मारे गए थे। नगर अपराध शाखा ने इसके बाद बताया था कि मुठभेड़ में मारे गए लोग लश्कर ए तैयबा के आतंकवादी थे और वे तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को मारने के लिए गुजरात आए थे।

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