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जानें, जैन मुनि तरुण सागर के जीवन की अनंत यात्रा के बारे में और उनके कुछ महत्वपूर्ण कोट्स

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Sep 01, 2018 10:29 am IST,  Updated : Sep 01, 2018 11:38 am IST

भले ही लड़ लेना झगड़ लेना पिट जाना या फिर पीट देना मगर कभी बोलचाल बंद मत करना क्यूंकि बोलचाल के बंद होते ही सुलह के सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं।

Jain Muni Tarun Sagar- India TV Hindi
Jain Muni Tarun Sagar

नई दिल्ली: जैन मुनी तरुण सागर का दिल्ली में शनिवार को 51 वर्ष की उम्र में पीलिया के कारण निधन हो गया। वह कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उन्होनें शनिवार रात 3 बजकर 11 मिनट पर राधेयपुरी, कृष्णानगर में आखिरी सांस ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर ट्वीट कर शोक व्यक्त किया। उन्होनें लिखा कि मुनी तरुण सागर जी महाराज के असामयिक निधन से गहरी पीड़ा हुई। हम उन्हें हमेशा आदर्शों, करुणा और समाज में योगदान के लिए याद करेंगे। 

कौन थे जैन मुनि तरुण सागर?

जैन मुनि तरुण सागर का जन्म 26 जून 1967, ग्राम गुहजी, जिला दमोह, राज्य मध्य प्रदेश में हुआ। उनका असल नाम पवन कुमार जैन था। इनके माता-पिता का नाम श्रीमती शांतिबाई जैन और प्रताप चन्द्र जैन था। उन्होंने 1981 में घर छोड़ दिया जिसके बाद उनकी शिक्षा दीक्षा छत्तीसगढ़ में हुई। उन्होंने 20 वर्ष की उम्र में दिगंबर मुनि की दीक्षा ली। जैन मुनि तरुण सागर अपने प्रवचनों के लिए काफी मशहूर रहे। मध्यप्रदेश सरकार ने जैन मुनि तरुण सागर को 6 फरवरी 2002 को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया भी दिया था। वो कड़वे प्रवचनों के लिए मशहूर थे। उनकी 'कड़वे प्रवचन' नाम से एक किताब भी है, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी है। 

मुनि श्री तरुण सागर जी महाराज के कहे कुछ कोट्स

1) वैसा मजाक किसी के साथ मत कीजिए जैसा मजाक आप सह नहीं सकते।

2) भले ही लड़ लेना झगड़ लेना पिट जाना या फिर पीट देना मगर कभी बोलचाल बंद मत करना क्यूंकि बोलचाल के बंद होते ही सुलह के सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं।

3) दुसरों के भरोसे जिंदगी जीने वाले लोग हमेशा दुखी रहते हैं, इसलिए अगर हम जीवन सुखी होना चाहते हैं, तो हमें आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करनी चाहिए।

4) माता पिता होने के नाते आप अपने बच्चों को खूब पढ़ाना लिखना और पढ़ा लिखा कर खूब लायक बनाना, मगर ये ध्यान रहे की इतना लायक भी मत बनाना की वह कल तुम्हे नालायक समझने लगे।

5) संघर्ष के बिना मिली सफलता को संभालना बड़ा मुश्किल होता हैं।

6) कोई आपको कुत्ता कहे तो भौंकें नहीं मुस्कुराएं। वह स्वयं शर्मिन्दा हो जाएगा। अन्यथा तुम सचमुच कुत्ता बन जाओगे।

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