नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रेणुका चौधरी ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे जाट समुदाय का आह्वान करते हुए उनसे अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर अभियान चलाने को कहा। साथ ही, अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक कोर समिति का गठन करने और एक कार्य योजना बनाने का सुझाव दिया।
ऑल इंडिया जाट महासभा की महिला अध्यक्ष रेणुका चौधरी ने कहा कि समुदाय को खुद को एक राजनीतिक ताकत बनाना होगा और वोट बैंक की राजनीति में एक बड़ी ताकत बनना होगा जिसे कोई नेता नजरअंदाज नहीं कर सके। उन्होंने यहां जाटों की एक सभा में कहा कि जब तक आप एक ताकत नहीं माने जाते और एकजुट होकर काम नहीं करते तब आप अपने अधिकारों को प्राप्त नहीं कर सकते।
उच्चतम न्यायालय ने ओबीसी श्रेणी में जाटों को शामिल करने की अधिसूचना को निरस्त कर दिया था जिसके मद्देनजर यह बैठक की गई। शीर्ष न्यायालय ने जुलाई में केंद्र की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसके जरिए न्यायालय के 17 मार्च के फैसले की समीक्षा करने की मांग की गई थी। उस फैसले में जाटों के लिए ओबीसी आरक्षण को रद्द कर दिया गया था।
कोर्ट ने आरक्षण खत्म किया,लेकिन सरकार पर दबाव बनाया जाएगा
समुदाय के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हालांकि न्यायालय ने उनके लिए आरक्षण को खत्म कर दिया है, पर वे सरकार पर अपनी मांगों के लिए दबाव बनाना जारी रखेंगे। रेणुका ने कहा, हमें फौरन ही एक कोर समिति गठित करनी चाहिए जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि हों और अंदरूनी मतभेदों को दूर करते हुए एक कार्य योजना तैयार करनी चाहिए। समिति अपने न्यायोचित मांगों पर दावा करने के लिए एक पांच सूत्री एजेंडा पर काम कर सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद संविधान मामलों का वकील भी रखना चाहिए। जब तक हम अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगे, तब तक कोई भी सरकार हमारे अनुरोध को नहीं सुनेगी। उन्होंने जाट आरक्षण मुद्दे पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।