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बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे JNU छात्र, कन्हैया भी शामिल

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 28, 2016 09:04 am IST,  Updated : Apr 28, 2016 09:04 am IST

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की दंडात्मक कार्रवाई को निष्प्रभावी करने की मांग करते हुए विश्वविद्यालय के छात्रों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।

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नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की दंडात्मक कार्रवाई को निष्प्रभावी करने की मांग करते हुए विश्वविद्यालय के छात्रों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। नौ फरवरी की विवादास्पद घटना को लेकर जेएनयू ने कुछ छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई की है। जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों के साथ बुधवार रात से भूख हड़ताल शुरू की।

भूख हड़ताल शुरू करते हुए छात्रों ने कहा कि उन लोगों ने मामले की जांच करने वाली उच्च स्तरीय जांच समिति के निष्कर्षों और सिफारिशों को खारिज कर दिया है। कन्हैया, उमर और अनिर्बान भट्टाचार्य को फरवरी में संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के विरोध में कैंपस में कार्यक्रम आयोजित करने पर देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस कार्यक्रम में कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारे लगे थे। सभी आरोपी अभी जमानत पर बाहर है।

गौरतलब है कि 9 फरवरी  को लगे भारत विरोधी नारे के मामले में जेएनयू की जांच कमेटी ने 21 छात्रों को दोषी पाया था। सभी ने प्रॉक्टर को लिखित में अपना जबाव दिया था। अपनी रिपोर्ट में प्रॉक्टर ने वाइस चांसलर (वीसी) को लिखा था कि तीन छात्रों को निकाल दिया जाना चाहिए, जबकि बाकी के छात्रों से फाइन लिया जाए। इस मामले पर आखिरी फैसला वीसी को करना था।

‘जुर्माना और दंडित करने का जेएनयू का फैसला अस्वीकार्य’

उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा था कि उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासन का फैसला अस्वीकार्य है और उच्च स्तरीय जांच समिति की जांच बस ‘हास्यास्पद’ है। छात्र संघ ने इस मामले पर देशव्यापी अभियान की धमकी दी थी।

अपनी प्रतिक्रिया में जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि हास्यास्पद जांच के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई बस अस्वीकार्य है और संघ इसे खारिज करता है। खुद कन्हैया कुमार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

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