नयी दिल्ली: न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर ने आज भारत के 43वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली । उन्हें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यहां राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में शपथ ग्रहण कराई। उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश 63 वर्षीय न्यायमूर्ति ठाकुर को न्यायमूर्ति एचएल दत्तू की सेवानिवृत्ति के बाद प्रधान न्यायाधीश :सीजेआई: पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। न्यायमूर्ति दत्तू कल सेवानिवृत्त हुए थे।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर उन्होंने उस पीठ की अध्यक्षता की जिसने इंडियन प्रीमियर लीग में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग घोटालों के आरोपों के मद्देनजर बीसीसीआई में सुधार संबंधी फैसला सुनाया था। न्यायमूर्ति ठाकुर ने उस पीठ की भी अध्यक्षता की जिसने पूर्वी भारत मंे हुए करोड़ों रूपए के चिंट फंड घोटाले की जांच के आदेश दिए थे। इस घोटाले को सारदा घोटाले के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने करोड़ों रूपए के एनआरएचएम घोटाले की भी सुनवाई की जिसमें कई नेताओं और नौकरशाहों के साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा भी आरोपी हैं।
चार जनवरी 1952 को जन्मे न्यायमूर्ति ठाकुर एक वर्ष से अधिक समय तक सीजेआई का पदभार संभालेंगे और चार जनवरी 2017 को सेवानिवृत्त होंगे।