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बलात्कार सहित संगीन अपराधों में किशोर आयु 16 करने संबंधी विधेयक संसद में पारित

 Written By: India TV News Desk
 Published : Dec 22, 2015 07:42 pm IST,  Updated : Dec 22, 2015 11:39 pm IST

नई दिल्ली: आज राज्यसभा में जुवेनाइल बिल पर करीब 5 घंटे तक चली चर्चा के बाद बिल को पास कर दिया गया, जिससे बलात्कार जैसे जघन्य अपराध करने वाले 16 साल या उससे ज़्यादा आयु

After 5 hours long discussion juvenile justice bill passed...- India TV Hindi
After 5 hours long discussion juvenile justice bill passed in rajya sabha

नई दिल्ली: आज राज्यसभा में जुवेनाइल बिल पर करीब 5 घंटे तक चली चर्चा के बाद बिल को पास कर दिया गया, जिससे बलात्कार जैसे जघन्य अपराध करने वाले 16 साल या उससे ज़्यादा आयु वाले अपराधी को बालिग माना जाएगा।

इससे पहले राज्यसभा में महत्वपूर्ण विधेयकों को तत्काल पेश करने को लेकर सदस्यों के बीच सहमति बनने के एक दिन बाद मंगलवार को किशोर न्याय संशोधन विधेयक को पर चर्चा शुरू हुई। दिल्ली में 16 दिसम्बर, 2012 को हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी किशोर (अब बालिग) की सुधार गृह में तीन साल की अवधि पूरी हो चुकी है।

किशोर न्याय विधेयक (बाल देखरेख एवं संरक्षण), 2014 में जघन्य अपराधों में संलिप्त 16-18 साल के किशोर-किशोरियों पर भी वयस्कों के समान ही मुकदमा चलाने का प्रावधान है। इसके अलावा कम संगीन अपराध में संलिप्त पाए जाने पर 16-18 साल के उन किशोर-किशोरियों से वयस्कों के समान ही बर्ताव करने का प्रावधान है जैसा 21 साल की उम्र के बाद गिरफ्तार किए जाने वाले अपराधी से किया जाता है। विधेयक के बारे में विस्तृत विवरण देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत ही बाल सुधार गृह की स्थापना की जाएगी।

मेनका ने कहा, "वे (किशोर दोषी) वयस्कों के लिए बने जेल में वयस्क अपराधियों के साथ नहीं रहेंगे। उन्हें बाल सुधार गृह में रखा जाएगा। वर्तमान में ऐसा नहीं है। इसकी स्थापना की जाएगी।" दोषी किशोर तब तक बाल सुधार गृह में रहेंगे, जब तक कि उनकी उम्र 21 वर्ष नहीं हो जाती, जिसके बाद इस बात का मूल्यांकन किया जाएगा कि उन्हें रिहा किया जाए या नहीं। मंत्री ने कहा, "उनकी समीक्षा होगी। यदि अब भी उनका झुकाव अपराध की ओर है, तो उन्हें पूरी सजा काटनी होगी।"

मेनका ने कहा कि मौजूदा कानून से किशोर अपराध को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा, "अपराध में किशोर-किशोरियों की संलिप्तता तेजी से बढ़ रही है। बच्चे पुलिस थाने में पहुंचकर कहते हैं कि उन्होंने हत्या की है। हमें किशोर न्याय (बोर्ड) भेजा जाए।" बच्चों के खिलाफ बच्चों के अपराध की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने आश्चर्य जताया, "क्या हम दोषी या अपराधी को बचाने जा रहे हैं?"

मेनका ने कहा, "यह (विधेयक) 16 वर्ष के एक किशोर को यह कहने से रोकेगा कि उसने झुग्गी में आग लगाई है और मुझे किशोर न्याय (बोर्ड) भेजा जाए। या मैंने दुष्कर्म किया है, हत्या की है, मुझे किशोर न्याय (बोर्ड) के समक्ष पेश किया जाए।" दोषी की रिहाई के विरोध में हो रहे प्रदर्शन के बीच सोमवार को सदस्यों की मांग पर राज्यसभा में किशोर न्याय विधेयक को चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया गया था।

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