Highlights
- पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की समझौते के बाद भारत को लेकर फैली थी गलत खबर।
- MEA ने रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए सोशल मीडिया यूजर्स को चेताया।
- भारत-इजरायल रिश्तों को मजबूत करने पर मोदी-नेतन्याहू में हुई बातचीत।
नई दिल्ली: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए नए सुरक्षा समझौते के बाद भारत के इजरायल से रक्षा समझौता करने की खबरों को विदेश मंत्रालय ने फर्जी करार दिया है। MEA ने कहा कि सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने एक रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए उसे ‘फेक न्यूज’ बताया और लोगों को ऐसी पोस्ट से सावधान रहने की अपील की।
तुर्की की वेबसाइट ने फैली झूठी खबर
दरअसल, तुर्की की मीडिया वेबसाइट ‘Straturka’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बने सुरक्षा ढांचे के जवाब में भारत ने इजरायल के साथ रक्षा समझौते को लेकर बातचीत शुरू की है। रिपोर्ट में पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया था। इसके बाद यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई। MEA ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी पोस्ट को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, जिनमें AI की मदद से फर्जी सामग्री तैयार की जाती है। मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने 'X' पर लिखा कि इस तरह के दुर्भावनापूर्ण पोस्ट से सावधान रहने की जरूरत है।
पाकिस्तान-सऊदी और तुर्की का गठजोड़
बता दें कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और सुरक्षा तालमेल बढ़ाना है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते में कहा गया है कि किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और इसके तहत रक्षा सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को करीब से देख रही है और आगे की जानकारी साझा की जाएगी।
PM मोदी और नेतन्याहू के बीच हुई थी बात
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत भी हुई। दोनों नेताओं ने भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। MEA ने साफ किया कि यह फोन कॉल इजरायल की तरफ से की गई थी। बातचीत में दोनों देशों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग और रिश्तों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
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