श्रीनगर: हुर्रियत कान्फ्रेंस के दोनों धड़ों ने जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किए जाने की निन्दा की और कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया। कन्हैया को संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने के मामले में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हुर्रियत के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने यहां एक बयान में कहा, जेएनयू के छात्र के खिलाफ पुलिस कार्रवाई अलोकतांत्रिक है।
हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी ने एक अलग बयान में कन्हैया की गिरफ्तारी और छात्रों तथा प्रोफेसर एसएआर गिलानी के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने की निन्दा की।
बता दें कि JNU में अफजल गुरु को फंसी दिए जाने के विरोध में आयोजित किए गए कार्यक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने कन्हैया को कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली जावेद को भी पूछताछ के लिए तलब किया गया। इस बीच, पुलिस ने कहा कि कन्हैया और फरार चल रहे पांच अन्य आरोपियों के आतंकवादी संगठनों से कथित रिश्तों की जांच की जा रही है।
पुलिस ने अदालत को बताया कि भारतीय सेना के खिलाफ और पाकिस्तान, अफजल गुरू और 1984 में हत्या के एक मामले में फांसी की सजा पा चुके मकबूल भट्ट के पक्ष में नारेबाजी की गई थी। सुनवाई के दौरान पुलिस ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट लवलीन के सामने एक कंप्यूटर पर वीडियो फुटेज चलाकर दिखाया। इस पर न्यायाधीश ने कन्हैया से सवाल किया कि वे कौन सी आजादी की मांग रहे थे ?
न्यायाधीश ने यह सवाल उस वक्त किया जब वीडियो फुटेज में कुछ लोगों को भारत से कश्मीर की आजादी की मांग की नारेबाजी करते देखा गया। इस पर कन्हैया ने कहा कि वह सभी को नहीं जानते, क्योंकि उनमें से कुछ जेएनयू के नहीं बल्कि बाहरी थे। फुटेज देखते वक्त न्यायाधीश ने एक बार कहा, ऐसा लगता है कि वे भारत में रहने की बात से दुखी हैं।