नई दिल्ली: देशभक्ति की कोई जुबां नहीं होती, देशभक्ति की कोई भाषा नहीं होती, देशभक्ति का कोई रंग नहीं होता, देशभक्ति का कोई ढंग नहीं होता, देशभक्ति की कोई जात-पात नहीं होती और न ही देशभक्ति की कोई नस्ल। देशभक्ति की न तो कोई पराकाष्ठा होती है और न ही विविधता। देशभक्ति न उसूलों से चलती है और न ही किताबी सिद्धांतों एवं मानकों से तय होती है। देशभक्ति तो रगों में बहती है और भावनाओं के लहू में तैरती हुई अहसासों से बयां हो जाती है। देशभक्ति मखमली स्पर्श सी होती है जो एक ऐसी सुखन देती है कि हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हम भले ही कितने विविधतावादी हो लेकिन बस एक गीत हमें इस कदर एक कर देता है कि हम सब कुछ भूल जाते हैं।
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Video: देशभक्ति की कोई जुबां नहीं होती, यकीन मानिए
नई दिल्ली: देशभक्ति की कोई जुबां नहीं होती, देशभक्ति की कोई भाषा नहीं होती, देशभक्ति का कोई रंग नहीं होता, देशभक्ति का कोई ढंग नहीं होता, देशभक्ति की कोई जात-पात नहीं होती और न ही
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