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सिर्फ सुबह के वक्त ही होती है फांसी, जानिए ऐसा क्यों होता है

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 30, 2015 08:46 am IST,  Updated : Jul 30, 2015 10:18 am IST

नई दिल्ली: 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को नागपुर जेल में आज सुबह फांसी दे दी गई है। जेल सूत्रों के मुताबिक, 9 लोगों के सामने याकूब को फांसी दी गई। अपनी

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फांसी की सजा सुनाने के बाद जज द्वारा पेन का निब तोडना
फांसी की सजा सबसे बड़ी सजा होती है क्योंकि इससे उसका जीवन समाप्त हो जाता है। इसलिए जज फैसला सुनाने के बाद अपने पेन की निब तोड़ देते है ताकि उस पेन का दोबारा इस्तेमाल न हो।

फांसी देने से पहले जल्लाद क्या बोलता है
जल्लाद फांसी देने से पहले बोलता है कि मुझे माफ कर दो। हिंदू भाईयों को राम-राम, मुस्लिम को सलाम, हम क्या कर सकते है हम तो हुकुम के गुलाम है।

आखिरी ख्वाहिश की मांग में जेल प्रशासन क्या दे सकता है?
जेल प्रशासन फांसी से पहले आखिरी ख्वाहिश पूछता है जो जेल के अंदर और जेल मैन्युअल के तहत होता है इसमें वो अपने परिजन से मिलने, कोई खास डिश खाने के लिए या फिर कोई धर्म ग्रंथ पढ़ने की इच्छा करता है अगर यह इच्छाएं जेल प्रशासन के मैन्युअल में है तो वो पूरी करता है।

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