नई दिल्ली: अमेरिका की तीन विश्वविद्यालयों के ताजा अध्ययन में साफ हुआ है कि दुनिया एक और सामूहिक विलोपन (Mass extinction) के दौर में प्रवेश कर रही है। शोधकर्ताओं ने आशंका जताई है कि इसकी चपेट में सबसे पहले इंसान आएंगे।
स्टैनफर्ड, प्रिंसटन और बर्कली विश्वविद्यालय का अध्ययन कहता है कि जीवों की प्रजातियां सामान्य के मुकाबले 114 गुना ज्यादा रफ्तार से विलुप्त हो रही हैं। इस अध्ययन ने पिछले साल आई ड्यूक यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट की पुष्टि की है।
नए अध्ययन में कहा गया है, 'हम छठे बड़े सामूहिक विलोपन के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इसी तरह की घटना आज से 6 करोड़ 50 लाख साल पहले हुई थी, जब संभवत: एक उल्कापिंड के टकराने के बाद धरती से डायनासोर विलुप्त हो गए थे।

अध्ययनकर्ता गेरार्डो सिबैलस ने कहा, 'अगर इस तरह से ही सब जारी रहा तो धरती को उबरने में कई साल लग जाएंगे और हम बहुत जल्दी विलुप्त हो जाएंगे।' रिपोर्ट्स ने चेतावनी दी है कि आने वाली तीन पीढ़ियों के अंदर ही मधुमक्खियों द्वारा होने वाला पॉलिनेशन (परागण फूल के मेल पार्ट से फीमेल पार्ट तक जाना) बंद हो सकता है।'
वैज्ञानिकों ने जीवों (रीढ़ वाले जानवारों) के विलुप्त होने का अध्ययन किया तो पाया कि अभी जो विलुप्त होने की रफ्तार है, वह सामान्य के मुकाबले 100 गुणा ज्यादा है। 1900 से लेकर अब तक 400 से ज्यादा जीव लुप्त हो गए हैं। इस तरह का नुकसान सामान्य तौर पर एक हजार साल में होता है।
इससे पहले भी कई बार महाप्रलय की भविष्यवाणी की गई।
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