
आतंकवादी गोलियां चला रहे थे लेकिन रॉकी चट्टान की तरफ गेट पर खड़े थे और हमले का सामना कर रहे थे। अपनी रायफल से ताबड़तोड़ गोलियां बरसा रहे रॉकी गोलियों से जख्मी हो गए थे लेकिन उनका हौंसला जरा भी कम नहीं हुआ। रॉकी के शौर्य के सामने आतंकवादियों के हौंसले पस्त हो गए। एक आतंकवादी मौके पर ही ढेर हो गया जबकि दूसरा आतंकवादी नवेद भाग खड़ा हुआ। रॉकी ने अपनी एके 47 रायफल की सारी गोलियां दुश्मन को निपटाने और साथियों को बचाने में खाली कर दी।
रॉकी वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन उनके घर यानी हरियाणा के यमुनानगर के फतेहपुर तुम्बी में कोई भी नेता तसल्ली देने के लिए नहीं पहुंचा। शहीद रॉकी के घरवाले इस बात से बेहद नाराज थे।
शहीद रॉकी ने अपना बलिदान देकर 44 साथी जवानों को बचाया और एक पाकिस्तानी आतंकवादी को ढेर किया। रॉकी ने अपनी जान देकर देश का मस्तक नीचे नहीं होने दिया। शहीद रॉकी ने देश के लिए मर मिटने वालों के लिए मिसाल कायम की है।
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