नई दिल्ली: उधमपुर में दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद रॉकी का आज यमुनानगर में अंतिम संस्कार किया गया। रॉकी ने बहादुरी से लड़ते हुए BSF के 44 जवानों की जान बचा ली थी और खुद शहादत दे दी। दो आतंकवादियों से रॉकी तब तक लड़ते रहे जब तक उनके राइफल की अंतिम गोली खत्म नहीं हो गई।
रॉकी जो आतंकवादियों और 44 निहत्थे जवानों के बीच किसी चट्टान की तरह खड़ा हो गया, अब पंचतत्व में विलीन हो चुका है। आज सबकी आंखें नम है। माता-पिता का रो रोकर बुरा हाल है। इस माता पिता की शौर्य गाथा पूरा देश गा रहा है लेकिन भला कौन माता पिता अपने बेटे को कंधा देना चाहेंगे। इसी अभागे नसीब पर आंखें भर आईं।
जिंदादिल रॉकी किसी नायक की तरह जिया, लड़ा भी किसी नायक की तरह और शहीद भी नायक की तरह हुआ। शहीद होने के बाद भी वो कईयों का नायक बन चुका है।
'रॉक फोर्स' के नाम से मशहूर रॉकी को जब अग्नि दी जा रही थी तब वहां मौजूद लोगों के दिलों में भी अग्नि जल रही थी। लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की।
रॉकी की दिलेरी को देश लंबे समय तक याद रखेगा। बुधवार को उधमपुर में BSF की बस को दो आतंकवादियों ने निशाना बनाया। उस बस में 44 जवान सवार थे लेकिन AK 47 रायफल सिर्फ रॉकी के पास थी। रॉकी ने जब देखा कि आतंकवादी रोड के बीचों बीच से बस पर फायरिंग कर रहे हैं। तभी रॉकी एक्शन में आ गए।
आगली स्लाइड में देखे वीडियो- आतंकवादी गोलियां चला रहे थे लेकिन रॉकी चट्टान की तरफ गेट पर खड़े थे और हमले का सामना कर रहे थे।