नई दिल्ली: मुंबई में एक साथ सात रेलवे स्टेशन और लोकल ट्रेन में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों पर 9 साल बाद कोर्ट का फैसला आया जिसमें 12 आरोपियों को दोषी करार दिया गया जबकि एक आरोपी अब्दुल वाहिद को बरी कर दिया गया है।आपको बता दें कि इस धमाके की जांच एटीएस ने की थी। जांच में पता चला था इसकी साजिश पकिस्तान में रची गई थी जबकि बम प्लांट करने के लिए सिमी के भारतीय सदस्यों का इस्तेमाल किया गया।
इस केस की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केस में 10 हजार पेज की चार्जशीट कोर्ट में फाइल की गई थी और कुल 2 हजार गवाहों की गवाही ली गई। इस मामले में 243 गवाहों के साथ बचाव और सरकारी पक्ष ने कोर्ट के अंदर सवालात पूछे।
एक नज़र हादसे पर…
11 जुलाई 2006 को शाम में जब लोकल ट्रेनों से लोग अपने घरों की तरफ लौट रहे थे कि तभी माटुंगा से मीरा रोड के बीच एक के बाद एक 7 धमाके हुए। इन धमाकों मे 187 की मौत हुई , 817 घायल हुए और करोड़ों का नुकसान हुआ था। चारों तरफ सिर्फ अफरा-तफरी और चीख पुकार फैल गई थी।
कब और कहां-कहां हुए थे धमाके:
माटुंगा - शाम 6.24 मिनट पर, 28 की मौत, 122 जख्मी
माहिम - शाम 6.23 मिनट पर, 43 की मौत, 96 जख्मी
बांद्रा - शाम 6.23 मिनट पर, 22 की मौत, 107 जख्मी
खार सबवे - शाम 6.25 मिनट पर, 9 की मौत, 102 जख्मी
जोगेश्वरी - शाम 6.24 मिनट पर, 28 की मौत, 115 जख्मी
बोरीवली - शाम 6.28 मिनट पर, 26 की मौत, 153 जख्मी
मीरा रोड - शाम 6.23 मिनट पर, 31 की मौत, 122 जख्मी
अगली स्लाईड में दोषी करार दिये गए आरोपियों के नाम और उन पर लगे आरोप: