रायगढ़: पिकनिक की मस्ती मातम में बदल गई और एक को बचाने की जद्दोजहद में 14 लोग डूब गए। महाराष्ट्र के रायगढ़ में समंदर में डूबकर जिन छात्रों की जान गई, उनमें से कई ऐसे थे जिन्होंने तीन-तीन, चार-चार लोगों को डूबने से बचाया और इस तरह दूसरों को जिंदगी देने की कोशिश में खुद डूब गए।
कैसे हुआ ये बेहद दर्दनाक हादसा?
रफिया अंसारी, सफिया अंसारी, मुनीर शेख, फरीन हुसैन आदि कई नाम है जो अपने परिवार की शान थे, अपने बुजुर्गों का अरमान थे लेकिन समंदर की जालिम लहरों ने एक ही झटके में 14 घरों के चिराग बुझा दिए। ये वो युवा हैं जो कल तक पुणे के एक कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे लेकिन अब ये चेहरे सिर्फ तस्वीर बन कर रहे गए हैं और अपने पीछे छोड़ गए हैं बेपनाह दर्द और आंसुओं का सैलाब।
रायगढ़ के मुरुड़ बीच पर पिकनिक मनाने आया था पुणे के आबेदा इनामदार सीनियर कॉलेज से 126 लोगों का ग्रुप। 5 टीचर थे और बाकी छात्र। खुशनुमा मौसम था, समंदर का किनारा था और चारों तरफ दोस्त यारों का ग्रुप था। सब कुछ अच्छा चल रहा था तभी अचानक समंदर का मिजाज बदलने लगा। अचानक ऊंची ऊंची लहरों उठीं और इससे पहले कि किसी के कुछ समझ में आता कई छात्र लहरों की चपेट में आ चुके थे।
कैसे समंदर की लहरों में समा गईं 14 जिंदगियां ?
समंदर के किनारे से लेकर लहरों के बीच तक अचानक अफरा तफरी मच गई थी। कुछ डूब रहे थे। कुछ अपनी जान की परवाह किए बगैर अपने साथी की जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। संकट की इस घड़ी में इन युवाओं ने गजब का जोश दिखाया। अपने साथियों को बचाने के लिए बार बार अपनी जोन जोखिम में डाली। बताया जा रहा है कि असल में सिर्फ एक लड़की डूब रही थी उसी के बचाने में कई लोग संतुलन खोते चले गए।
एक को बचाने की जद्दोजहद 14 लोगों की जान ले गई , जिनमें 9 लड़कियां, 1 महिला टीचर और 4 लड़के शामिल हैं। इस दर्दनाक घटना की खबर मिलते ही रागयढ़ से लेकर पुणे तक हड़कंप मच गया। शाम से ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। नेवी के प्रशिक्षित गोताखोरों के साथ ही हेलीकॉप्टर भी रेस्क्यू में लगे रहे। सुबह कोस्ट गार्ड की ऐसी स्पेशल शिप को रेस्क्यू में लगाया गया जो छिछले पानी में भी चलाई जा सकती है।
लहरों ने मारा या लापरवाही ने ?
रात भर के सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में 13 शव मिल चुके थे लेकिन एक गुमशुदा छात्र सैफ अहमद की तलाश जारी थी। सुबह करीब 9 बजे सैफ की बॉडी भी बरामद कर ली गई। स्थानीय लोग और नाविक बताते हैं कि इस बीच पर अक्सर हाई टाइड आता है लेकिन बीच पर कहीं कोई चेतावनी का बोर्ड नहीं लगाया गया था। ट्रायंगल होने की वजह से यहां पानी चढ़ने का खतरा बना रहता है।
रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो गया। जांच और जिम्मेदारी तय करने की कागजी कार्रवाई तो होती रहेगी लेकिन इन रोते बिलखते परिवारों ने जो खोया है उसकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी।
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