नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक पर राजनीतिक गतिरोध से ग्रामीण विकास पर गंभीर असर पड़ रहा है। इस मुद्दे पर विचार करने के लिए उनके द्वारा बुलाई गई राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (नीति) आयोग की दूसरी बैठक का कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री ने बहिष्कार किया। बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भूमि विधेयक के मुद्दे के समाधान के आड़े राजनीतिक विचारधारा नहीं आनी चाहिए।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस ने बैठक का बहिष्कार किया।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि अगर संसद में भूमि अधिग्रहण विधेयक पर कोई सहमति नहीं बनाई गई, तो सभी राज्य भूमि संबंधित अपना कानून बनाने के इच्छुक हैं।
मोदी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर काम करना चाहिए।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "प्रधानमंत्री ने कहा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक पर राजनीतिक गतिरोध का स्कूल, अस्पताल, सड़क तथा सिंचाई परियोजना सहित ग्रामीण विकास पर गंभीर असर पड़ा है।"
उन्होंने कहा कि जहां तक किसानों को मुआवजा बढ़ाने की बात है, केंद्र तथा राज्य सराकर के विचार में कोई फर्क नहीं है।
मोदी ने कहा कि विभिन्न राज्यों ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा बनाए गए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास अधिनियम 2013 पर चिंता जाहिर की है, वहीं कुछ राज्यों का मानना है कि विकास कार्य अधिनियम के प्रावधानों के कारण प्रभावित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, "कुछ मुख्यमंत्रियों ने अधिनियम में बदलाव की अपील की है, और इसके लिए पत्र भी भेजा है।"
मोदी ने कहा कि सरकार राज्यों के विचारों को ध्यान में रखेगी।
कांग्रेस के प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने कहा कि पार्टी के मुख्यमंत्री नीति आयोग की बैठक में नहीं गए, क्योंकि भूमि विधेयक पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट है। कांग्रेस 2013 के कानून में बदलाव के विरुद्ध है।
जेटली ने कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के बैठक में शामिल न होने की आलोचना की।
उन्होंने कहा, "जिन्होंने नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार किया, उन्हें इस बात का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि क्या यह संघवाद की भावना के खिलाफ नहीं? आप सामने आकर वैकल्पिक राय रख सकते हैं।"
वित्त मंत्री ने कहा, "मुख्यमंत्रियों ने कहा कि या तो केंद्र को सहमति बनानी चाहिए या फिर राज्यों को अपना कानून बनाने की छूट देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे सहमति के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कर सकते।"
उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2013 के कानून का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि एक अन्य राय यह थी कि भूमि अधिग्रहण में बाधा के कारण आर्थिक विकास में बाधा पैदा हो रही है।
यह बैठक 21 जुलाई से मानसून सत्र की शुरुआत के कुछ दिन पहले हुई है। इस बैठक में आठ भाजपा शासित राज्यों सहित 16 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में कांग्रेस शासित राज्यों के नौ मुख्यमंत्रियों के अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी शामिल नहीं हुए।