नई दिल्ली: दिल्ली में 23 और 24 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और पाकिस्तान के एनएसए की मुलाक़ात पर दुनिया की नज़र थी लेकिन दिलचस्पी इस बात में ज़्यादा थी कि नरेंद्र मोदी के संकटमोचक ने पाकिस्तान को बेनक़ाब करने के लिए कैसा चक्रव्यूह तैयार किया।
ये ऐसी शख़्सियत हैं जिनके पास पाकिस्तान का हर कच्चा चिट्ठा है। हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ साज़िशों का भरपूर पुलिंदा है और पाकिस्तान के लिए उन्होंने जो डोज़ियर तैयार किया, उसे लेकर सरहद पार हड़कंप मचा है।

जी हां, आपने सही सोंचा। हम बात कर रहे हैं केरल कैडर के 1968 बैच के रिडायर्ड आईपीएस अफसर अजीत डोभाल की जो इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक रहे हैं। 1988 में अजीत डोभाल को कीर्ति चक्र दिया गया वो कीर्ति चक्र पाने वाले पहले आईपीएस अफसर हैं।
कीर्ति चक्र की ये कहानी मई 1988 की है, जब अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को खाली कराने के लिए ऑपरेशन ब्लैक थंडर की योजना बनी। कहते हैं कार्रवाई से कुछ दिन पहले से ही स्वर्ण मंदिर के आसपास एक नया रिक्शा वाला दिखने लगा था।
खालिस्तानी आतंकियों को उस पर शक हुआ। 10 दिन तक उसकी निगरानी के बाद एक दिन आतंकियों ने उसे रोका, तो रिक्शावाला उन्हें भरोसा दिलाने में कामयाब हो गया कि वो आईएसआई का एजेंट है और उनकी मदद करने आया है। वो रिक्शा वाला कौन था, ये पहेली है। लेकिन खालिस्तानियों आतंकियों से मिलने के बाद अजीत कुमार डोभाल जो सटीक जानकारी जुटा लाए, उसकी बदौलत ब्लैक कैट्स कमांडोज ने 41 आतंकी मार गिराए, 200 आतंकियों ने सरेंडर किया।
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