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नदियों को जोड़ने को लेकर गलतफहमियों को दूर करने की ज़रूरत: उमा भारती

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 29, 2016 11:33 pm IST,  Updated : Apr 29, 2016 11:33 pm IST

नई दिल्ली: केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने को लेकर देश में कई तरह की भ्रांतियां हैं, जिसे दूर करने की जरूरत

Uma Bharati- India TV Hindi
Uma Bharati

नई दिल्ली: केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने को लेकर देश में कई तरह की भ्रांतियां हैं, जिसे दूर करने की जरूरत है। नदियों को आपस में जोड़ने के लिए गठित विशेष समिति की शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित नौवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि देश के कुछ भागों में हाल ही में आए सूखे को देखते हुए नदियों को आपस में जोड़ने की योजना का तेजी से कार्यान्वयन और अधिक आवश्यक हो गया है।

नदियों को जोड़ने से जल के बहाव में कमी नहीं आएगी

उमा ने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने से समुद्र में नदी के जल के प्रवाह में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा, "हम नदी के मीठे जल के प्रवाह को नहीं रोक रहे हैं, बल्कि सिर्फ मॉनसून और बाढ़ के अतिरिक्त जल को इन नदियों से कम प्रवाह वाली नदियों में ले जाएंगे। इससे किसी भी नदी के सामान्य जल प्रवाह पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।"

नदियों के बारे में लोगों की गलतफहमियों को दूर किया जा रहा है

उन्होंने कहा कि ओडिशा में भी महानदी-गोदावरी संपर्क को लेकर कुछ भ्रांतियां थी। पर, जब उन्हें यह बताया गया कि महानदी को गोदावरी से जोड़ने से पहले सुवर्णरेखा-महानदी संपर्क के जरिए पहले महानदी में अतिरिक्त पानी छोड़ा जाएगा, तब वहां महानदी-गोदावरी संपर्क को लेकर व्याप्त भ्रांतियां दूर हो गईं। केन-बेतवा नदी संपर्क को इस पूरी योजना का आधार बताते हुए उमा भारती ने यह उम्मीद जताई कि इसके पहले चरण का काम तीन महीने के अंदर शुरू हो जाएगा। दमन गंगा-पिंजाल और पार-तापी-नर्मदा संपर्क योजनाओं को भी जल्द शुरू किए जाने पर उन्होंने बल दिया।

नदियों को जोड़ने पर लातूर जैसे सूखे की स्थिति से निपटना होगा संभव

महाराष्ट्र में लातूर के सूखे का उल्लेख करते हुए उमा भारती ने कहा कि नदी संपर्क योजनाओं से इस तरह की स्थिति से बड़े कारगर ढंग से निपटा जा सकता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की 24 जुलाई, 2014 को हुई बैठक में नदियों को आपस में जोड़ने संबंधी विशेष समिति के गठन को मंजूरी दी गई थी। समिति की पहली बैठक 17 अक्टूबर, 2014 को हुई थी।

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