नई दिल्ली: नदियों में तेजी से बढ़ते प्रदूषण को रोकने की कवायद में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक बड़ा फैसला लिया है। गोमुख से लेकर हरिद्वार तक की गंगा के प्रदूषण को देखा जाए तो सबसे ज्यादा वस्तु जो कचरे से निकलती है वो प्लास्टिक होती है। अब ट्रिब्यूनल ने इसी प्लास्टिक पर बैन लगा दिया है। यह नया नियम एक फरवरी 2016 से लागू होगा। माना जा रहा है कि यह कदम गंगा में बढ़ते प्रदूषण को काफी हद तक रोकने में कामयाब होगा। गौरतलब है कि क्रेंद सरकार भी गंगा की सफाई को लेकर काफी गंभीर है और उसने गंगा के पुर्नरुद्धार के लिए एक मंत्रालय भी बनाया है जिसकी जिम्मेवारी उमा भारती को सौंपी गई है।
क्या है NGT का नया फरमान- NGT का कहना है कि अब जो भी गंगा में प्लास्टिक फेकेगा उस पर 5 से 20 हजार रुपए तक का जुर्माना वसूला जाएगा। साथ ही ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड से यह भी कहा है कि वो सर्वे के आधार पर गंगा प्रदूषण पर एक रिपोर्ट तैयार करे। ट्रिब्यूनल का तो यहां तक कहना है कि अगर कोई भी इंडस्ट्री इन नियमों का पालन नहीं करेगी तो उसे भी नोटिस भेजकर बंद करवाने का आदेश दे दिया जाएगा। वहीं अब अगर इंडस्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी बगैर शोधन के गंगा में प्रवाहित किया गया तो इंडस्ट्री से प्रतिदिन के हिसाब से 5000 रुपए वसूले जाएंगे।
गौरतलब है कि ट्रिब्यूनल ने यह आदेश होटल्स, धर्मशालाओं और शहरों से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे गंगा में प्रवाहित किए जाने को देखकर ही दिया है।