नई दिल्ली: सरकार वन रैंक वन पेंशन पर जल्द ही बड़ा एलान कर सकती है। सरकार वन रैंक वन पेंशन के फॉर्मूले के करीब पहुंच गई है। अब सरकार को सिर्फ ये तय करना है कि वन रैंक वन पेंशन लागू करने का बेस इयर 2011 रखा जाए या 2013 रखा जाए। साल 2011 को बेस ईयर चुनने से सरकारी खजाने पर 4000 करोड़ का बोझ आएगा जबकि सरकार अगर 2013 को बेस ईयर चुनती है तो सरकारी खजाने पर 8000 करोड़ का खर्च आएगा।
आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रिसिपल सेक्रेटरी नृपेन्द्र मिश्रा और पूर्व सैनिकों के बीच PMO में एक मीटिंग हुई। एक घंटे चली इस मीटिंग में नृपेन्द्र मिश्रा ने सिर्फ एक बात कही कि सरकार जल्दी से जल्दी OROP लागू करेगी। लेकिन भूख हड़ताल पर बैठे रिटायर्ड फौजियों का अनशन तुरंत खत्म करवाया जाए कयोंकि सरकार को उनकी सेहत की चिन्ता है।
मीटिंग में रिटायर्ड सैनिकों के नुमाइंदों ने दो शर्तें रखीं। पहली सरकार OROP की डेफीनिशन में बदलाव नहीं करेगी। दूसरी OROP 1 अप्रैल 2014 से ही लागू होगा। सरकार की तरफ से किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए दस दिन का वक्त मांगा गया है। वन रैंक वन पेंशन लागू होने से करीब 22 लाख पूर्व सैनिकों और 6 लाख war widows को फायदा पहुंचेगा।
रिटायर हुए किसी सर्विसमैन को मिलती वही पेंशन उस रैंक के सभी रिटायर्ड ऑफसर्स को मिले। इसमें सरकारी खजाने पर चार हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा। दूसरा फार्मूला ये कि OROP लागू करने के लिए 2013 की पेंशन को बेस बनाया जाए। अगर सरकार ये विकल्प अपनाती है तो सरकारी खजाने पर आठ हजार करोड़ का बोझ होगा। उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार दस दिन में फैसला कर लेगी क्योंकि आंदोलन कर रहे रिटायर्ड फौजियों ने भी दस दिन तक अपने आंदोलन को तेज न करने का भरोसा सरकार को दिया है।