
क्यों मनाया जाता है ओणम
मिथकों के अनुसार असुरों का एक राजा था जिसे महाबली के नाम से जानते हैं। यह महाबली (वास्तविक नाम इन्द्रसेन) प्रहलाद का पोता था। अपने पिता की तरह महाबली भी परम विष्णु भक्त था। अश्वमेघ के जरिये उसने अपना एक साम्राज्य स्थापित कर लिया था जहाँ लोगों में पूरी समानता थी, कोई जाति या धर्म भेद नहीं था। समस्या यह थी कि महाबली एक असुर था और देवलोक के राजा इंद्र, महाबली के उपलब्धियों से विचलित हो गए थे। उन्हें उनका सिंहासन डोलता नज़र आने लगा। वे अपने आपको असुरक्षित महसूस करने लगे और दौड़े दौड़े विष्णु जी के पास गए और नमक मिर्ची लगाकर अपना दुखड़ा सुनाया। दूसरी तरफ इन्द्र की माता अदिति ने भी “पयोव्रत” द्वारा भगवान् विष्णु का आह्वान किया। यह सर्वज्ञात था कि महाबली परम दानवीर है। भगवान् विष्णु ने इंद्र पर छाए हुए संकट को दूर करने के लिए एक योजना बनायीं। उन्होंने अदिति के ही गर्भ से वामन रूप में जन्म लिया।