श्रीनगर: श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव में 38 मतदान केंद्रों पर आज हुए पुनर्मतदान में केवल 2 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले जो कि राज्य के इतिहास में सबसे कम मतदान प्रतिशत है। हालांकि अधिकारियों के अनुसार पूरे संसदीय क्षेत्र का कुल मतदान प्रतिशत अब 7.13 हो गया है।
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आज मतदान के दौरान हालात कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहे। रविवार को मतदान के दौरान बड़े स्तर पर हिंसा की वजह से पुनर्मतदान कराया गया। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा, शाम चार बजे मतदान समाप्त होने तक 38 मतदान केंद्रों पर कुल 34,169 मतदाताओं में से 709 ने ही वोट डाले।
अधिकारी के मुताबिक खानसाहिब विधानसभा क्षेत्र में एक भी वोट नहीं डाला गया वहीं बडगाम में केवल तीन वोट पड़े। चरार-ए-शरीफ विधानसभा में 84 वोट पड़े। सुबह सात बजे से शुरू हुए मतदान में बीरवाह में 362 और चाडूरा में 261 लोगों ने वोट डाला।
अधिकारी के मुताबिक पथराव की कुछ मामूली घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि बडगाम जिले के सोइबग और नसरल्लापुरा इलाकों में पथराव की दो घटनाएं सामने आई हैं लेकिन सुरक्षा बलों ने उपद्रवियों को खदेड़ दिया। उपचुनाव के परिणाम 15 अप्रैल को घोषित किये जाएंगे।
नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला और सत्तारूढ़ पीडीपी के नजीर अहमद खान समेत 9 उम्मीदवार मैदान में हैं। पीडीपी सांसद तारिक अहमद कर्रा ने हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की पिछले साल आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत के बाद भड़के आंदोलन में लोगों पर ज्यादती होने का आरोप लगाते हुए विरोध में लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
रविवार को हिंसा की वजह से पुनर्मतदान का आदेश दिया गया। रविवार को हिंसा में आठ लोग मारे गये और 100 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी घायल हो गये। अधिकारियों के मुताबिक फर्जी मतदान के आरोपों को लेकर बीरवाह के बदरां में नेशनल कांफ्रेंस और सत्तारूढ़ पीडीपी के कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी हो गयी।
बाद में मतदान अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के हस्तक्षेप से मामले का समाधान निकाला गया। जम्मू कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शांतमनु ने कहा कि मतदान अब तक का सबसे कम रहा लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। रविवार की हिंसा को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस और अद्र्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया था।
अनंतनाग लोकसभा उपचुनाव के लिए कल होने वाले मतदान को 25 मई तक टाल दिया गया है। इस बारे में पूछे जाने पर शांतमनु ने एक चैनल से कहा, हम उस समय सुरक्षा की स्थिति को देखेंगे लेकिन मुझे नहीं लगता कि भविष्य में कभी भी इतने सुरक्षा बल की तैनाती जरूरी होगी क्योंकि यह वास्तव में काफी अधिक तैनाती थी।