नई दिल्ली: भारत औऱ पाकिस्तान के बीच एनएसए लेवल की वार्ता के रद्द होने का समाचार है, हालांकि औपचारिक ऐलान होना बाकी है।
क्या है भारत-पाक एनएसए लेवल वार्ता-
भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों को हल करने के लिए दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकार मिलकर बातचीत करते हैं। आगामी 24 अगस्त को भी भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पाकिस्तान के सुरक्षा सलाहकार सरताज अज़ीज़ को दिल्ली में मिलना था।
ऊफा में प्रधानमंत्री मोदी ने दिया था बातचीत का न्योता-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊफा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को निमंत्रण दिया था कि दोनों देशों को एनएसए स्तर की बातचीत फिर से शुरू करनी चाहिए, जिसे नवाज़ शरीफ ने मान लिया था। उफा में दोनों देशों के नेता बहुत गर्मजोशी से मिले थे।
सुरक्षा सलाहकारों को मिलना था दिल्ली में-
ऊफा में दोनों यह निश्चित किया गया था कि भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पाकिस्तान के सुरक्षा सलाहकार सरताज अज़ीज़ के बीच बातचीत दिल्ली में 24 अगस्त हो होगी।
एनएसए लेवल बीतचीत का एजेंडा-
ऊफा में निश्चित किया गया था कि दिल्ली में प्रस्तावित एनएसए लेवल की वार्ता में आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत की जाएगी, कश्मीर के बारे में तब कोई जिक्र तक नहीं किया गया था। दोनों देशों के संबंध सुधारने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना गया था।
पाकिस्तान बातचीत के लिए गंभीर नहीं-
जब कश्मीर में पाक आतंकवादी नवेद को जीवित पकड़ लिया गया था, तो पाकिस्तान को यह डर सताने लगा कि बातचीत में क्रास-बॉर्डर टेरेरिस्म का मुद्दा भी उठाया जाएगा औऱ तब नवेद के बारे में जवाब देना पाकिस्तान के लिए मुश्किल हो जाएगा। यह वजह है कि पाकिस्तान ने अपना पुराना कश्मीर राग छेड़ दिया। जैसे-जैसे बातचीत का वक्त पास आता गया, पाकिस्तान ने उल्टा भारत पर पाक धरती पर आतंकवादियों की वित्तीय मदद करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया।
भारत ने फिर स्पष्ट किया कि एजेंडा आतंकवाद है-
भारत ने 18 अगस्त को पाकिस्तान को फिर स्पष्ट कर दिया था कि एनएसए लेवल वार्ता में सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे पर बात होगी, जैसा कि ऊफा में निश्चित किया गया था।
बातचीत दोनों देशों के बीच, तीसरा पक्ष स्वीकार्य नहीं-
भारत ने पाकिस्तान को यह भी स्पष्ट कर दिया था कि बातचीत दोनों देशों के बीच होगी, कोई तीसरा पक्ष स्वीकार्य नहीं होगा। लेकिन पाकिस्तान ने बातचीत में तीसरे पक्ष को जोड़ने की अपनी हठधर्मी नहीं छोड़ी और भारत को यह वार्ता रद्द करनी पड़ी। पाकिस्तान के ऊफा एजेंडे से पीछे हटने की वजह से ही एनएसए लेवल की वार्ता पर रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है।
पिछले साल रद्द हुई थी भारत-पाक विदेश स्तर की बातचीत-
पाकिस्तान की हठधर्मिता के चलते पिछले साल भी विदेश सचिव स्तर की बातचीत रद्द हो गई थी। तब भी कारण हुर्रियत को बातचीत में शामिल करने की पाकिस्तान की जिद थी।