नई दिल्ली/इस्लामाबाद: ज़की-उर-रहमान लखवी की रिहाई का मुद्दा यूएन में उठाने के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस्लामाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर कर जल्द सुनवाई की मांग की है जिसके चलते मुंबई हमले का मास्टरमाइंड फिर जेल जा सकता है।
लखवी की रिहाई मुद्दे पर भारत के दखल के बाद पाकिस्तान चारों ओर से घिर गया है। यही वजह है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने वहां की सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वो लखवी के मामले की सुनवाई जल्द करे।
दूसरी तरफ, हाफ़िज़ सईद ने कहा कि लखवी बेकसूर है, भारत के पास कोई सबूत नहीं है कि लखवी मुंबई हमले में शामिल था और भारत-यूएन को पाकिस्तान की न्यायिक प्रकिया में दखलअंदाजी का हक नहीं है।
हाफ़िज़ सईद ने कहा, "लखवी बेकसूर है... भारत के पास कोई सबूत नहीं है कि लखवी मुंबई हमले में शामिल था... भारत ने लखवी को सज़ा दिलाने के लिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाने की हताशा में यूएन और अमेरिका से संपर्क किया है... भारत और यूएन को पाकिस्तान की न्याय प्रक्रिया में दखल देने का कोई हक़ नहीं है... भारत ने पहले भी कभी पाकिस्तानी अदालतों के फ़ैसलों को नहीं माना है।"
लाहौर हाईकोर्ट ने पिछले महीने लखवी को ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
लखवी का नाम अंतर्राष्ट्रीय आतंकियों की लिस्ट में है, ऐसे में लखवी की ज़मानत यूएन प्रतिबंध समिति के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। जिसके बाद यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की समिति ने कहा था कि वो पाकिस्तान से इस मुद्दे पर बात करेगी।
पीएमओ में राज्यमंत्री, जितेंद्र सिंह, ने कहा कि "कुछ देशों ने पहले तो आतंकवाद के ख़िलाफ़ भारत के रुख को नहीं समझा... लेकिन धीरे धीरे ज़्यादा से ज़्यादा देश इस बात का एहसास करने लगे हैं कि आतंकवाद को लेकर भारत का नज़रिया सही था।"