नई दिल्ली: लोकसभा ने आधार विधेयक में राज्यसभा द्वारा सुझाए पांचों संशोधनों को खारिज कर दिया और ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के विधेयक के संबंध में विपक्ष की आशंकाओं को दूर करने के बाद आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ तथा सेवाओं का लक्षित वितरण) विधेयक-2016 को पारित कर दिया गया।
राज्यसभा ने पांच संशोधनों के साथ आधार विधेयक लोकसभा को लौटा दिया था। इसमें एक संशोधन आधार को स्वैच्छिक बनाए रखने का भी था, जबकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह स्पष्ट किया कि निजता की सुरक्षा के लिए विधेयक में कड़े प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसका उद्देश्य सही हितग्राही तक सब्सिडी का लाभ पहुंचाना है।
इससे पहले राज्यसभा में आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ तथा सेवाओं का लक्षित वितरण) विधेयक-2016 पर सदन में तीखी बहस हुई और विपक्ष ने इसे धन विधेयक के रूप में पेश किए जाने पर सवाल उठाया। राज्यसभा में पारित पांच संशोधनों में आधार पंजीकरण (धारा 3), सरकारी सेवाओं और सब्सिडी के लिए आधार की अनिवार्यता (धारा-7), राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सूचना का सार्वजनिक किया जाना (धारा 33) और निजी व्यक्तियों को आधार के उपयोग की अनुमति (धारा 57) शामिल थे।
सदन में सुझाव दिया गया कि आधार को स्वैच्छिक रखा जाए, राष्ट्रीय सुरक्षा की जगह सार्वजनिक सुरक्षा और आपात स्थित में सूचनाओं को सार्वजनिक करने की अनुमति दी जाए, निजी व्यक्तियों द्वारा आधार उपयोग की धारा को हटाया जाए। सभी पांच संशोधनों का प्रस्ताव कांग्रेस सदस्य जयराम रमेश ने पेश किए। रमेश ने कहा, "मेरे पास आधार नंबर नहीं है और मुझे चाहिए भी नहीं, क्योंकि मैं सब्सिडी का लाभार्थी नहीं हूं। लेकिन कल मुझे यदि मोबाइल नंबर लेना हो, तो मुझसे आधार नंबर मांगा जाएगा। आपने इसे अनिवार्य बना रखा है।" जेटली ने इस पर कहा कि आधार अनिवार्य नहीं है। जेटली ने जवाब में कहा, "जिनके पास आधार नंबर नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक दस्तावेज बताए जाएंगे।"
जेटली ने कहा, "कल यदि तमिलनाडु सरकार एक विशेष आय वर्ग के लोगों के लिए सब्सिडी देने का फैसला करती है, तो उसका लाभ लेने के लिए आधार अनिवार्य है।" मंत्री ने कहा, "यदि सब्सिडी बिना पहचान के दी जाए, तो योग्यता नहीं रखने वालों को सब्सिडी मिलेगी और योग्य को सब्सिडी नहीं मिल पाएगी। इसलिए लोगों को सब्सिडी का लाभ देने के लिए आधार कार्ड या अन्य वैकल्पिक दस्तावेज को पूर्व शर्त बनाना होगा।"
उन्होंने कहा कि विधेयक के तहत निजी सूचनाओं को संबंधित व्यक्ति की सहमति से ही साझा किया जा सकता है और यदि सहमति हो तब भी मुख्य बायोमेट्रिक सूचनाओं को साझा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "निजी सूचना साझा किए जाने का एक मात्र आधार राष्ट्रीय सुरक्षा होगा। एक प्राधिकार दिल्ली में बनाया जाएगा। प्राधिकार के फैसले की समीक्षा कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाला प्राधिकार करेगा।"