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पलटू पाकिस्तान की फिर खुली पोल, NIA से क्यों डरा पाकिस्तान?

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 08, 2016 08:54 pm IST,  Updated : Apr 08, 2016 08:55 pm IST

नई दिल्ली: पठानकोट हमले पर पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने सख्त रुख अपनाया है। मोहाली की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने पठानकोट अटैक को अंजाम दिलाने वाले जैश के चार हैंडलर्स के खिलाफ

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नई दिल्ली: पठानकोट हमले पर पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने सख्त रुख अपनाया है। मोहाली की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने पठानकोट अटैक को अंजाम दिलाने वाले जैश के चार हैंडलर्स के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया है। ये चार हैंडलर्स मसूद अजहर, उसका भाई रऊश असगर, काशिफ जान और शाहिद लतीफ है। हिंदुस्तान ने पाकिस्तानी हाई कमिश्नर को भी करारा जवाब दिया है, जिन्होंने कहा था कि NIA टीम के पाकिस्तान जाने की कोई बात नहीं हुई थी।

पलटू पाकिस्तान की फिर खुली पोल

सवाल तो उसी वक्त उठे थे कि जो आईएसआई और पाक फौज दिन रात हिंदुस्तान की बर्बादी के ख्वाब देखती है, उसपर यकीन कैसे करें। जो पाकिस्तान अपनी जमीन पर चलनेवाली टेरर फैक्ट्री में ट्रेनिंग देकर पठानकोट में फिदायीन भेजता है, उसकी JIT को एयरफोर्स स्टेशन आने की इजाजत क्यों दी जाए फिर भी इजाजत दी गई। जांच कहिए या रेकी, पाकिस्तान की जेआईटी ने पठानकोट पहुंचकर इनविस्टिगेशन के ड्रामे को बखूबी अंजाम दिया लेकिन जब बात आई कि एनआईए टीम के पाकिस्तान जाने की, तो पाकिस्तान फिर उसी दोमुंहेपन पर उतर आया।

अपना नंबर आया तो छूटा पसीना ?

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा कि JIT आई तो NIA भी जाएगी, ऐसी तो कोई बात ही नहीं हुई थी। बासित ने कहा, ‘ये मेरे लिए कहना बडा मुश्किल है लेकिन इस वक्त मुझे लगता है कि पूरी जांच में सिर्फ (भारतीय NIA टीम के पाकिस्तान ) आने या जाने का सवाल नहीं है बल्कि दोनों देशों के सहयोग का है जिससे घटना की तह तक जाया जा सके इसलिए फिलहाल मैं इस बारे में नहीं जानता। जब उनसे पूछा गया कि आप इसे आने-जाने की बात नहीं कह रहे तो इसका मतलब आप NIA के पाकिस्तान दौर के लिए मना कर रहे हैं तो इसपर उन्होंने कहा, ‘मैं इसे आपकी कल्पना पर छोड़ता हूं।’

एनआईए की टीम पाकिस्तान जाएगी या नहीं, इसे बासित साहब ने कल्पना पर छोड़ दिया जबकि हकीकत ये है कि पाकिस्तान की JIT के भारत दौरे से पहले नियम-शर्तें तय हो गई थीं। इंडियन हाई कमीशन ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय को पहले ही बता दिया था कि ये सब कुछ आदान-प्रदान की शर्त पर हो रहा है। पाकिस्तान के साथ 26 मार्च को ये रजामंदी बनी थी और इसी के बाद 27 मार्च को जेआईटी भारत आई थी। NIA ने JIT को कहा था जब वो भारत में जांच के लिए आई थी कि वो भी अपनी जांच के लिए पाकिस्तान आना चाहेंगी।

आगे की स्लाइड में पढ़िए NIA से क्यों डरा पाकिस्तान ?

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