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स्वतंत्रता दिवस पर संबोधित करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि संसद अखाड़े में तब्दील हो चुका है।

 Written By: India TV News Desk
 Published : Aug 14, 2015 07:54 pm IST,  Updated : Aug 14, 2015 10:25 pm IST

नई दिल्ली: पाकिस्तान को परोक्ष संदेश देते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि हमारे पड़ोसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी सरजमीं का इस्तेमाल भारत के प्रति शत्रुता रखने वाली ताकतें नहीं

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प्रणब मुखर्जी ने पड़ोसी देशों को दी सलाह

नई दिल्ली: पाकिस्तान को परोक्ष संदेश देते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि हमारे पड़ोसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी सरजमीं का इस्तेमाल भारत के प्रति शत्रुता रखने वाली ताकतें नहीं कर पाएं तथा भारत आतंकवाद का उपयोग शासन की नीति के हथियार के तौर पर करने के किसी भी प्रयास को खारिज करता है।

देश के 69वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के संबोधन में मुखर्जी ने कहा, यद्यपि हम मित्रता के लिये अपना हाथ स्वेच्छा से आगे बढ़ाते हैं परंतु हम जानबूझकर की जा रही उकसावे की हरकतों और बिगड़ते सुरक्षा परिवेश के प्रति आंखें नहीं मूंद सकते। भारत, सीमापार से संचालित होने वाले शातिर आतंकवादी समूहों का निशाना बना हुआ है।

हमारी सीमा पर घुसपैठ करने और अशांती फैलाने वालों से कड़ाई से निपटा जएगा।

आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की भारत की नीति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, हम शासन की नीति के एक उपकरण के रूप में आतंकवाद का उपयोग करने के किसी भी प्रयास को खारिज करते हैं। हमारी सीमा में घुसपैठ तथा अशांति फैलाने के प्रयासों से कड़ाई से निबटा जाएगा।

राष्ट्रपति ने कहा, हिंसा की भाषा तथा बुराई की राह के अलावा इन आतंकवादियों का न तो कोई धर्म है और न ही वे किसी विचारधारा को मानते हैं। हमारे पड़ोसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके भू-भाग का उपयोग भारत के प्रति शत्रुता रखने वाली ताकतें न कर पाएं।

मुखर्जी का बयान गुरदासपुर और उधमपुर में हुए हालिया आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि में आया है। राष्ट्रपति ने भारत की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए उन दो ग्रामीणों राकेश कुमार शर्मा और विक्रमजीत सिंह की सराहना की जिन्होंने उधमपुर में मोहम्मद नावेद याकूब नामक पाकिस्तानी आतंकवादी को जिंदा पकड़ा था।

रणनीतिक क्षेत्रों में बढ़ेगी भारत और दक्षिण कोरिया की साझेदारी

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सभ्यतागत संबंधों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि वह आश्वस्त हैं कि रणनीतिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच की भागीदारी का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि कोरिया गणतंत्र के साथ अपने परंपरागत संबंधों को भारत समझता है। हमारे सभ्यतागत पूराने संबंधों में मौजूदा समय में खासी वृद्धि हुयी है। यह संतोष की बात है कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफल यात्रा के दौरान एक विशेष रणनीतिक भागीदारी के स्तर तक पहुंच गए।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर वहां की सरकार और लोगों को दिए अपने संदेश में मुखर्जी ने कहा, मैं आश्वस्त हूं कि रणनीतिक क्षेत्रों में हमारी साझेदारी बढ़ेगी और इसमें विविधता आएगी।

अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष पार्क ग्यून..हये को भेजे संदेश में मुखर्जी ने कहा कि भारत की सरकार, यहां के लोग और खुद की तरफ से वह कोरिया गणतंत्र ,उसके लोग और सरकार को शुभकामनाएं देते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, महानायकों की एक महान पीढ़ी ने इस विकट चुनौती का सामना किया। उस पीढ़ी की दूरदर्शिता तथा परिपक्वता ने हमारे इन आदशो को रोष और भावनाओं के दबाव के अधीन विचलित होने अथवा अवनत होने से बचाया ।

उन्होंने कहा कि इन असाधारण पुरुषों एवं महिलाओं ने हमारे संविधान के सिद्धांतों में, सभ्यतागत दूरदर्शिता से उत्पन्न भारत के गर्व, स्वाभिमान तथा आत्मसम्मान का समावेश किया, जिसने पुनर्जागरण की प्रेरणा दी और हमें स्वतंत्रता प्रदान की।। हमारा सौभाग्य है कि हमें ऐसा संविधान प्राप्त हुआ है जिसने महानता की ओर भारत की यात्रा का शुभारंभ किया।

मुखर्जी ने कहा कि इस दस्तावेज का सबसे मूल्यवान उपहार लोकतंत्र था, जिसने हमारे प्राचीन मूल्यों को आधुनिक संदर्भ में नया स्वरूप दिया तथा विविध स्वतंत्रताओं को संस्थागत रूप प्रदान किया। इसने स्वाधीनता को शोषितों और वंचितों के लिए एक सजीव अवसर में बदल दिया तथा उन लाखों लोगों को समानता तथा सकारात्मक पक्षपात का उपहार दिया जो सामाजिक अन्याय से पीडित थे।

उन्होंने कहा कि हमारे देश की उन्नति का आकलन हमारे मूल्यों की ताकत से होगा, परंतु साथ ही यह आर्थिक प्रगति तथा देश के संसाधनों के समतापूर्ण वितरण से भी तय होगी। हमारी अर्थव्यवस्था भविष्य के लिए बहुत आशा बंधाती है। भारत गाथा के नए अध्याय अभी लिखे जाने हैं।

मुखर्जी ने कहा कि आर्थिक सुधार पर कार्य चल रहा है। पिछले दशक के दौरान हमारी उपलब्धि सराहनीय रही है और यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि कुछ गिरावट के बाद हमने 2014-15 में 7.3 प्रतिशत की विकास दर वापस प्राप्त कर ली है। परंतु इससे पहले कि इस विकास का लाभ सबसे धनी लोगों के बैंक खातों में पहुंचे, उसे निर्धनतम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कही ये अहम बातें-

आज राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संबोधन में सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी, खिलाड़ियों और सैनिको समेत देश को स्वतंत्रता दिवस पर बधाई दी, इसके साथ ही उन्होंने जनता और पड़ोसी देशों को कई सारी महत्वपूर्ण बाते भी बताई।

- फिर राष्ट्रपति ने संबोधित करते हुए कहा कि उन्नती का अकलन हमारे मूल्यों की ताकत से होगा।

-विकास का लाभ निर्धन व्यक्ति तक पहुंचना सबसे ज्यादा जरूरी है।

-लोकतंत्र की हमारी संस्थाएं दबाव में है। और दबाव के अखाड़े में तबदील हो चुकि है।

- राष्ट्रपती ने कहा कि समय आ गया है कि जनता और दल गंभीर चिंतन करे।

- हम एक समावेशी लोकतंत्र है और और समावेशी अर्थव्यवस्था।

- भारत की अनेकता में एकता की भावना को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए: राष्ट्रपति

- और साथ ही हमें अपने आदर्श और अतीत को नहीं भूलना चाहिए।

- राष्ट्रपति ने आतंकवाद पर पड़सी देशों से कहा कि, आतंकवाद का कोई धर्म और विचारधारा नहीं होती। इसके लिए अपनी का इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए।

- जो अपना अतीत भुला देता है वह कुछ महत्वपूर्ण खो देता है।

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