मुंबई: रिजर्व बैंक ने आज अपनी नीतिगत दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की कटौती की और नकदी आपूर्ति बढ़ाने के भी कई उपाय किये जिससे बैंकों को उत्पादक क्षेत्रों को ऋण सहायता देने के लिए सस्ता और अधिक धन उपलब्ध होने की संभावना है। रपो वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को उनकी तात्कालिक जरूरत के लिए धन उधार देता है। केंद्रीय बैंक ने साथ ही आगे भी नीतिगत उदारता बनाए रखने का संकेत दिया है।
आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने अप्रैल- मार्च 2016-17 की पहली द्वैमसिक मौद्रिक नीति समीक्षा जारी करते हुए कहा कि इस समय स्थापित उत्पादन क्षमता का पूरा उपायोग नहीं हो पाने के कारण निजी निवेश का स्तर कम है। ऐसे में नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत कटौती से आर्थिक वृद्धि मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। रेपो दर अब घटकर 6.5 प्रतिशत पर आ गयी है। यह कटौती बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। हालांकि इसकी घोषणा का शेयर बाजार विपरीत असर दिखा और बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स करीब कारोबार के दौरान एक समय 300 अंक नीचे चला गया।
राजन ने बैंकों के पास रिण देने योग्य नकदी बढ़ाने के भी कई पहलें कीं है। उन्होंने इसके लिए उसने रेपो तथा रिवर्स रपो और बैंक दर के बीच के अंतर का दायरा एक प्रतिशत से घटा कर 0.50 प्रतिशत कर दिया है। इस कदम से कारण रिवर्स रेपो छह प्रतिशत और बैंक दर सात प्रतिशत कर दी गयी है। रिजर्व बैंक जिस दर पर अल्प समय के लिए बैंकों से अतिरिक्त कोष लेता है उसे वह रिवर्स रेपो दर कहलाती है। तथा बैंक दर रिजर्व बैंक के अपेक्षाकृत अधिक समय के उधार पर लगायी जाने वाली ब्याज दर है।