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शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मददगार दवा की पहचान की

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नयी दवा की पहचान की है जो सार्स-सीओवी2 से संक्रमित चूहों को कोविड-19 के कारण गंभीर रूप से बीमार होने से रोकने में मददगार साबित हुई है और यह श्वसन संबंधी अन्य कोरोना वायरस के उपचार में भी सहायक है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: May 31, 2021 16:29 IST
शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मददगार दवा की पहचान की - India TV Hindi
Image Source : PTI FILE PHOTO शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मददगार दवा की पहचान की 

नयी दिल्ली। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नयी दवा की पहचान की है जो सार्स-सीओवी2 से संक्रमित चूहों को कोविड-19 के कारण गंभीर रूप से बीमार होने से रोकने में मददगार साबित हुई है और यह श्वसन संबंधी अन्य कोरोना वायरस के उपचार में भी सहायक है। साइंस इम्यूनोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि ‘डाईएबीजेडआई’ नामक दवा शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय कर देती है जो प्रतिरक्षा की अग्रिम पंक्ति होती है।

अमेरिका में पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर सारा चैरी ने बताया, ‘‘इसमें यह पहली बार बताया गया कि एक ही खुराक से प्रतिरोधक क्षमता को समय रहते सक्रिय कर देने से वायरस पर काबू पाने में काफी मदद मिलती है। यह वायरस के दक्षिण अफ्रीकी स्वरूप B.1.351 के खिलाफ भी कारगर है, जो दुनियाभर में चिंता का विषय बना है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘सार्स-सीओवी 2 तथा रोग पर काबू पाने के लिए प्रभावी एंटी वायरल विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है क्योंकि वायरस के एक के बाद एक खतरनाक स्वरूप पैदा होते जा रहे हैं।’’ संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा की पहली पंक्ति श्वसन तंत्र की रोग प्रतिरोधक प्रणाली वायरस की पहचान करती है। सबसे पहले शोधकर्ताओं ने इसे और बेहतर तरीके से समझने के प्रयास के दौरान पाया कि वायरस छिपने में सक्षम है जिससे प्रतिरोधक क्षमता द्वारा इसकी समय रहते पहचान करने और इस पर प्रतिक्रिया देने में विलंब हो जाता है। 

शोधकर्ताओं के दल ने पाया कि दवा श्वसन तंत्र की कोशिकाओं में प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर सकती है और सार्स-सीओवी2 संक्रमण को गंभीर होने से रोकती है। उन्होंने अनेक दवाओं का परीक्षण किया तथा उसमें से ‘डाईएबीजेडआई’ को प्रभावी पाया। अभी इस दवा का क्लिनिक परीक्षण कुछ प्रकार के कैंसर के इलाज के लिए चल रहा है। सार्स-सीओवी2 से पीड़ित एक चूहे को जब यह दवा दी गई तो उसके वजन में कमी आने की परेशानी घटी और उसके फेफड़ों में संक्रमण में भी काफी कमी आई।

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