नई दिल्ली: उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने को लेकर हाईकोर्ट ने पूछा है कि क्या सरकार एक प्राइवेट पार्टी है? कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर आप कल राष्ट्रपति शासन हटा देते हैं और सरकार बनाने के लिए किसी और बुलाते हैं तो ये न्याय का मजाक होगा।
कोर्ट ने पूछा, 'क्या इस केस में सरकार प्राइवेट पार्टी है?' बीजेपी के बहुमत के दावों के बीच कोर्ट ने केंद्र से एक हफ़्ते तक राष्ट्रपति शासन नहीं हटाने का भरोसा देने के लिए कहा है। जब केंद्र ने कहा कि वह इस बात की कोई गारंटी नहीं दे सकते कि राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाया जाएगा या नहीं, तो हाई कोर्ट ने कहा, 'आपके इस तरह के व्यवहार से हमें तकलीफ हुई है।'
कोर्ट चाहता है कि उसका फैसला आने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन बना रहे। जजों ने कहा कि उन्हें चिंता इस बात की है कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो किसी को भी नई सरकार बनाने का मौका दिए जाने पर यह न्याय का मजाक होगा। नैनीताल हाई कोर्ट की डबल बेंच में चल रही सुनवाई में चीफ़ जस्टिस के एम जोसेफ़ ने केंद्र के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का पक्ष सुनने के दौरान कई सवाल किए।
इस मामले के साथ चल रहे 9 बागी विधायकों के मामले में उनके वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा कि यह समस्या कांग्रेस से नहीं बल्कि हरीश रावत और स्पीकर के साथ जुड़ी है, क्योंकि सभी 9 विधायक सदस्यता खत्म करने के बावजूद आज भी कांग्रेस के सदस्य हैं। बहस अभी चल रही है और शाम तक कोई बड़ा फैसला आने के आसार हैं।