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अगस्ता घोटाले पर राज्यसभा में हंगामा, TMC सांसद को सदन से निकाला

 Written By: IANS
 Published : May 02, 2016 06:48 pm IST,  Updated : May 02, 2016 06:49 pm IST

नई दिल्ली: राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने मंगलवार को प्रश्नकाल में व्यवधान पैदा करने वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सदस्य सुखेंदु शेखर राय को दिन भर के लिए सदन से निकाल दिया। इसके विरोध

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sukhendu shekhar Image Source : PTI

नई दिल्ली: राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने मंगलवार को प्रश्नकाल में व्यवधान पैदा करने वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सदस्य सुखेंदु शेखर राय को दिन भर के लिए सदन से निकाल दिया। इसके विरोध में तृणमूल के सदस्यों ने सदन का बहिष्कार किया। प्रश्नकाल के दौरान राय अपनी सीट पर खड़े थे और बार-बार यह जानना चाहते थे कि अगस्ता वेस्टलैंड रिश्वतखोरी के मामले में कौन-कौन लाभान्वित हुए हैं?

इससे नाराज नजर आ रहे सभापति ने सदस्य को बैठ जाने के लिए कहा। जब उन्होंने उनकी आज्ञा का पालन नहीं किया तो सभापति ने नियम 255 का उपयोग किया और उन्हें सदन से दिन भर के लिए बाहर जाने को कहा। नियम 255 कहता है, "सभापति किसी भी सदस्य को जिसका आचरण उनकी राय में पूरी तरह से नियम विरुद्ध है, तत्काल राज्यसभा से निकलने के लिए कह सकते हैं और जिसे ऐसा आदेश दिया गया है वह सदस्य तत्काल ऐसा करते हुए और खुद को दिन की शेष बैठक के लिए अनुपस्थित करेगा।"

ऐसा सभापति के बार-बार बैठ जाने के लिए की गई अपील पर ध्यान नहीं देने बाद हुआ।  अंसारी ने कहा, "यह सदन के एक वरिष्ठ सदस्य के लिए अशोभनीय है। यह किसी सदस्य का हस्तक्षेप नहीं, यह शोरगुल है।"  राय बार-बार अपना बयान दोहराते रहे। उन्होंने सुबह इस मामले में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से भी इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा था।

सदन की बैठक जैसे ही शुरू हुई, राय ने इटली की एक अदालत के फैसले का उल्लेख करते हुए प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा, "रक्षा मंत्री को यह बताने की जरूरत है कि अगस्ता वेस्टलैंड रिश्वत मामले से लाभान्वित कौन हुआ? गांधी कौन है, एपी कौन है?" राय ने जोर देकर कहा कि सरकार को दोषियों का नाम सार्वजनिक करना चाहिए, अंसारी ने उन्हें बार-बार बैठने के लिए कहा।

सभापति ने सदस्य से कहा कि वह पहले ही दो बार बोल चुके हैं, इसलिए प्रश्नकाल के दौरान उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा सकता। जब राय ने रुख बदलने से इनकार कर दिया तो अंसारी क्रोधित हो गए। उन्होंने कहा, "क्या कोई उन्हें बोलने से रोकेगा या मैं नियम 255 का इस्तेमाल करूं?" इसके बाद अंसारी ने नियम 255 का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, "कृपया आप सदन के बाहर चले जाएं। आपके खिलाफ नियम 255 लागू कर दिया गया है।"  राय के जाने के बाद कांग्रेस के आनंद शर्मा ने बोलने के लिए 10 सेंकेड मांगे। अंसारी ने इसकी अनुमति दी, इस पर तृणमूल सदस्य नाराज हो गए। तृणमूल के सदस्य नदीमुल हक ने सवाल किया कि उनके सदस्य को बोलने की अनुमति क्यों नहीं दी गई?

अंसारी ने सदस्य को डांटते हुए पूछा, "आप कौन हैं? आप इस तरह से क्यों बात कर रहे हैं?" इसके बाद तृणमूल के सदस्य सदन से बाहर चले गए। उनके बाहर जाते ही कांग्रेस के सदस्य आसन के समीप आकर जमा हो गए और शोर मचाने लगे। इस पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आसन से पूछा, " सदन की कार्यवाही बाधित करने वाले कांग्रेस के सदस्यों के खिलाफ उसी तरह नियम क्यों नहीं लागू किया जा रहा?" अंसारी ने कहा, "यह नियम अकेले सदस्य के लिए है।"  इसके बाद सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

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