नई दिल्ली: भारत सरकार के इटली की कंपनी से विवादित अगस्टा वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे मामले में इटली की अदालत ने माना है कि इसमें भारत के कुछ लोगों को 125 करोड़ की घूस दी गई थी। अदालत ने कंपनी के प्रमुख ऊर्सी हेलीकॉप्टर बनाने वाली कंपनी फिनमेक्कनिका को घूस देने का दोषी माना है। ऊर्सी को इस मामले में चार साल की सजा दी गई है।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को चुनौती भरे लहजे में कहा कि कांग्रेस साबित करे कि अगस्ता वेस्टलैंड के साथ वीवीआई हेलीकॉप्टर सौदे को लेकर रिश्वतखोरी में उसके नेता शामिल नहीं हैं। इटली की एक अदालत ने कहा है कि सौदे में भारतीय अधिकारियों को अवैध रकम दी गई थी। प्रसाद ने कहा, "अब चूंकि रिश्वत देने वालों को दोषी ठहराया जा चुका है, तो रिश्वत लेने वालों के साथ क्या होना चाहिए? क्या पूर्व रक्षामंत्री ए.के.एंटनी इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान जारी करेंगे। क्या वह यह बात कबूल करेंगे कि उनकी पार्टी के लोग घोटाले में शामिल हैं?"
इटली की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के साथ वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे को फरवरी 2010 में अंतिम रूप दिया गया था और उस पर हस्ताक्षर हुआ था। उस समय केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार थी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ए.के.एंटनी रक्षामंत्री थे। मिलान अपीली अदालत के एक न्यायाधीश ने 225 पृष्ठों के फैसले में कहा है कि 53 करोड़ डॉलर कीमत के 12 एडब्ल्यू101 हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति का ठेका पाने के लिए इटली की कंपनी ने भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी।
अगस्ता की मातृ कंपनी फिनमेक्के निका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गियुसेप ओरसी की गिरफ्तारी के बाद समझौता विवादों में आ गया और उसके बाद भारत सरकार ने सौदे को 2013 में रद्द कर दिया।
कोर्ट ने पूर्व वायुसेना प्रमुख त्यागी को दोषी माना:
दूसरी ओर मिलान की कोर्ट ने पूर्व वायु सेना प्रमुख एसपी त्यागी को भी दोषी माना है। 225 पन्नों की फाइल में 17 पन्ने त्यागी पर ही है। त्यादी का इस मामले में कहना है कि फैसले की पूरी कॉपी पढ़ने के बाद ही वो कोई प्रतिक्रिया देंगे। वो हमेशा से खुद को इस मामले में निर्दोष बताते आए है। 2005-07 के दौरान त्यागी वायु सेना के प्रमुख थे और तभी इटली के साथ चॉपर डील हुई थी।
भारत का इटली की कंपनी फिनमेक्कनिका कंपनी से 12 अगस्टा वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए साल 2010 में 3600 करोड़ का कारोबार हुआ था। इसमें तीन हेलिकॉप्टर की आपूर्ति की जा चुकी थी और 30 प्रतिशत राशि का भुगतान हुआ था. इस मामले में 362 करोड़ रुपये रिश्वत देने का आरोप लगा था।
इस सौदे में अदालत ने बिचौलियों के पास जब्त हस्तलिखित दस्तावेज के आधार पर माना कि अगस्टा कंपनी ने अपने हेलिकॉप्टर बेचने के लिए भारत में करीब 125 करोड़ रुपये के घूस बांटे हैं। हालांकि कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट नहीं है कि घूस किसे दी गई है।