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साहित्यकार उतरे सड़कों पर, साहित्य अकादमी ने चुप्पी तोड़ी

 Written By: India TV News Desk
 Published : Oct 23, 2015 07:05 pm IST,  Updated : Oct 23, 2015 11:22 pm IST

नई दिल्ली: साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने आज यहां कहा कि देश में साहित्यकारों की सर्वोच्च संस्था कन्नड़ के लेखक एमएम कलबुर्गी की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करती है और

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साहित्य अकादमी ने तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली: साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने आज यहां कहा कि देश में साहित्यकारों की सर्वोच्च संस्था कन्नड़ के लेखक एमएम कलबुर्गी की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करती है और भारतीय संस्कृति के बहुलवाद को संरक्षित रखने की अपील करती है।

साहित्य अकादमी लेखकों की आज़ादी के पक्ष में

तिवारी ने साहित्य अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद संवाददताओं से कहा, संस्था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का पूरी दृढ़ता के साथ समर्थन करती है और किसी भी लेखक के खिलाफ किसी भी तरह के अत्याचार की कड़े शब्दों में निंदा करती है। हम भारतीय संस्कृति के बहुलवाद को संरक्षित रखने की अपील करते हैं, जो दुनिया के लिए अनुकरणीय है।

पुरस्कार लौटाने वाले लेखक करें अपने फैसले पर पुनर्विचार

उन्होंने अकादमी के 61 सालों के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यह एक स्वायत्त संस्था है, जो लेखकों द्वारा संचालित होती है। पुरस्कारों सहित सभी फैसले लेखकों द्वारा ही लिए जाते हैं। अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले या संस्था से अपने को अलग करने वाले लेखकों से अकादमी का अनुरोध है कि वे अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। यहां आज संपन्न हुई कार्यकारी मंडल की बैठक में सभी भारतीय भाषाओं के 24 में से 20 सदस्यों ने भाग लिया।

समाज की एकता, समरसता बरकरार रहे

उन्होंने कहा कि अकादमी मांग करती है कि केंद्र और सभी राज्य सरकारें समाज और समुदाय के बीच शांतिपूर्ण सह अस्तित्व बनाये रखें। संस्था सभी समुदायों से भी विनम्र अनुरोध करती है कि जाति, धर्म, क्षेत्र और विचारधारा आधारित मरतभेदों को अलग रखकर एकता और समरसता को बरकरार रखें।

साहित्य अकादमी की चुप्पी के खिलाफ लेखकों का जुलूस

इस बीच करीब 50 से अधिक साहित्यकारों ने साहित्य अकादमी की चुप्पी के विरोध में सफदर हाशमी मार्ग स्थित श्रीराम सेंटर से साहत्य अकादमी तक मौन जुलूस निकाला। इनकी मांग थी कि लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध प्रकट करने के अधिकार की रक्षा की जाए।

'जनमत' ने कहा, निहित स्वार्थों की वजह से लौटाए जा रहे हैं पुरस्कार

उधर, ज्वाइंट एक्शन ग्रुप ऑफ नेशनलिस्ट माइंडेड आर्टिस्ट एंड थिंकर्स (जनमत) ने विरोध प्रदर्शन किया और साहित्य अकादमी को ज्ञापन सौंपा तथा लेखकों की मंशा पर सवाल उठाए। इनका कहना था कि लेखक निहित स्वार्थो की वजह से पुरस्कार लौटा रहे हैं।

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