नई दिल्ली: संता बंता के चुटकुले आज उस समय उच्चतम न्यायालय की समीक्षा के दायरे में आ गये जब शीर्ष अदालत ने सरदारों के बारे में चुटकुले पेश करने और उन्हें कम बुद्धिमान व्यक्ति के रूप में पेश करने वाली वेबसाइटों पर प्रतिबंध के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के लिये सहमति दे दी।
न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति वी गोपाल गौड़ा की पीठ ने कहा, 'यह सिख समुदाय अपने जबर्दस्त हास्यबोध के लिये जाना जाता है और वे भी ऐसे चुटकुलों का आनंद लेते हैं। आपने खुशवंत सिंह के चुटकुले देखे होंगे। यह सिर्फ मनोरंजन है। आप इसे क्यों रोकना चाहते हैं। अपना मुकदमा अच्छी तरह तैयार कीजिये। हम आपको सुनेंगे।'
5000 वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग की
शीर्ष अदालत में महिला वकील हरविन्दर चौधरी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उनका कहना था कि 5000 से अधिक ऐसी वेबसाइट हैं जिनमें सरदारों पर चुटकुले हैं और जो इस समुदाय के सदस्यों को दयनीय स्थिति में पेश करते हैं। चौधरी चाहती हैं कि सिख समुदाय को लक्षित करने वाली वेबसाइटों को अवरूद्ध करने के लिये वेब फिल्टर लगाने का निर्देश दूरसंचार मंत्रालय को दिया जाये क्योंकि इस तरह के चुटकुलों से भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए और 153-बी का उल्लंघन होता है।
चौधरी का कहना है कि सिख समुदाय से संबंधित सभी चुटकुलों पर प्रतिबंध लगाया जाये। उनका यह भी कहना है कि उनके बच्चे अपमानित और शर्मिन्दा महसूस करते हैं और वे अपने नाम के आगे सिंह और कौर नहीं जोड़ना चाहते।
वकील ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बिहार विधान सभा चुनाव प्रचार के दौरान उनकी एक हालिया टिप्पणी का जिक्र किया जिसमे वह कहते हैं कि सारे बिहारी बुद्धिमान होते हैं। याचिकाकर्ता वकील ने कहा कि इससे यह भी संकेत मिलता है कि मानो दूसरे समुदाय बुद्धिमान नहीं है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की, 'चिंता मत कीजिये, जब वह पंजाब जायेंगे तो वह कहेंगे कि सिख भी बुद्धिमान हैं।'