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ऐसे शंकराचार्य से भगवान बचाए!
स्वरूपानंद सरस्वती जिस पदवी को धारण किए हुए हैं, उससे न्याय के साथ खड़े होने की उम्मीद की जाती है लेकिन यहां तो शंकराचार्य ही अंधविश्वास फैलाने लगे। जाहिर है, ऐसा बयान किसी को भी नागवार गुजरेगा।
महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को इजाजत मिलना धार्मिक रुढ़ियों के टूटने के लिहाज से एक बहुत बड़ी घटना है। ऐसी धार्मिक रुढ़ियों के खिलाफ भी शंकराचार्यों को आवाज उठानी चाहिए थी लेकिन 94 साल के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती तो लगता है कि सिर्फ अल-जलूल बयानों को लेकर ही सुर्खियां बटोरना चाहते हैं।