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सियाचीन: बर्फीले तूफान में फंसे सेना के 10 जवान शहीद

 Written By: India TV News Desk
 Published : Feb 04, 2016 09:27 pm IST,  Updated : Feb 05, 2016 01:38 pm IST

सियाचीन: सियाचीन में बर्फीले तूफान में फंसे आर्मी के 10 जवानों की मौत हो गई है। मद्रास रेजीमेंट के ये जवान सियाचिन में 19 हजार 600 फीट की ऊंचाई पर एक पोस्ट पर तैनात थे।

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सियाचीन: सियाचीन में बर्फीले तूफान में फंसे आर्मी के 10 जवानों की मौत हो गई है। मद्रास रेजीमेंट के ये जवान सियाचिन में 19 हजार 600 फीट की ऊंचाई पर एक पोस्ट पर तैनात थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन जवानों की शहादत को सलाम किया है।

बुधवार को ये आर्मी पोस्ट बर्फीले तूफान की चपेट में आ गया था। उसके बाद से ये सभी जवान लापता थे। पिछले करीब 40 घंटे से जबानों की तलाश में आर्मी और एयरफोर्स ने सर्च ऑपरेशन चला रही थी। खोजी कुत्तों की मदद से जवानों की तलाश की गई। हेलीकॉप्टर और बर्फ काटने वाली बड़ी मशीनों का भी इस्तेमाल किया गया लेकिन इन जवानों को बचाया नहीं जा सका।

PM मोदी ने किया जवानों की शहादत को सलाम

पीएम मोदी ने इन जवानों की शहादत को सलाम किया है। मोदी ने ट्वीट करके कहा, ‘सियाचिन में सैनिकों की शहादत काफी दुखद है। जिन फौजियों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, उनकी शहादत को मैं सलाम करता हूं। शहीदों के परिवारों को मेरी हार्दिक संवेदना।’

दुनिया की सबसे ऊंची युद्धभूमि की दर्दनाक हकीकत

सियाचिन में तैनात जवानों की ज़िंदगी, बर्फ से चमकती ये चोटियां भले ही जन्नत सा आभास दिलाती हों, लेकिन सियाचीन में जवानों के लिए जिंदगी जहन्नुम से कम नहीं है। सियाचीन विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है और भारत-पाकिस्तान दोनों के लिए सामरिक तौर पर बहुत अहम माना जाता है।

  • सियाचीन में भारत के करीब 10 हजार सैनिक तैनात हैं
  • यहां जवानों की पोस्टिंग 3 महीने के लिए होती है
  • 3 महीने तक जवानों के लिए नहाना और शेविंग मुमकिन नहीं होता
  • यहां तैनात जवान बर्फ को पिघलाकर पानी पीते हैं
  • हजारों फीट की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी होती है
  • भयानक ठंड की वजह से हाथ पैरों में गलन हो जाती है
  • 1984 के बाद से अब तक यहां 879 जवानों की मौत हो चुकी है

यानी सियाचिन में दुश्मनों की गोलियों से ज्यादा ख़तरा माइनस 40 से माइस 60 डिग्री की ठंड और अचानक आने वाले एवलांच हैं।

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