
सुरेंदर मित्तल- देखो कितने बदकिस्मत लोग हैं बेचारे वो उनको आवाज़ ही नहीं सुनती बेचारी की ..हैं
राधे मां- और तुम कितने खुशकिस्मत हो कि पागल..तुम पागल..तुम पागल (पागलपन )
सुरेंदर मित्तल-सच्ची में तुम मुझे, मुझे देखो आवाज़ सुना रही हो और मै सुन नहीं रहा..सच्ची में बदकिस्मत हो..
राधे मां- तू पागल है..तू पागल है..तू पागल
सुरेंदर मित्तल- हा हा हा हा..(हंसते हुए )
राधे मां- मुझे इसिलिए तुमसे प्यार हुआ है क्योंकि तुम पागल हो...प्यार हुआ (गाते गुए)
राधे मां- क्योंकि कृष्ण भगवान ने कहा कि अरे अर्जुन चाहे तू पत्थर मारे ..चाहे तू जूतियां मारे , चाहे कुछ भी करे लेकिन प्यार तो मुझे ही करता है ..क्योंकि तुम्हारे दिल दिमाग से मैं निकलती ही नहीं क्योंकि तुम मुझे लव करते हो..
सुरेंदर मित्तल- हूं..सही बात है
राधे मां- क्योंकि जो भक्त हैं वो तो फिर भी मुझे भूल जाते हैं पर तुम तो दिन रात बीस बार तो मेरा फोटो देखते हो
सुरेंदर मित्तल- अच्छा
राधे मां- हां क्योंकि तुम मुझे लव करते हो
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