नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज जजों की नियुक्ति से जुड़े राष्ट्रीय न्यायिक आयोग को असंवैधिनिक घोषित कर दिया है। इससे पहले लंबी-चौड़ी बहस के बाद पांच जजों की पीठ ने 15 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पांच-सदस्यीय बेंच ने न्यायिक नियुक्ति आयोग को असंवैधानिक घोषित किया। इसी के साथ बेंच ने इस मामले को बड़ी बेंच में भेजने की याचिका भी खारिज की। अब कोलेजियम सिस्टम जारी रहेगा।
गौरतलब है कि वर्तमान एनडीए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए 22 साल पुराने कोलेजियम सिस्टम की जगह एनजेएसी का गठन किया था।
वर्तमान में किसी उच्च न्यायालय में नए जज की नियुक्ति के लिए उसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और दो सबसे वरिष्ठ जज नियुक्ति के लिए सिफारिश करते हैं। उन्हें यह अधिकार 1993 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत मिला है। शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों की स्क्रूटनी 5 सबसे वरिष्ठ जजों के द्वारा किया जाता है जिसे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया द्वारा फाइनल किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट जजों की यही टीम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों का चुनाव करती है जो कि जो कि बाद में सुप्रीम कोर्ट में जाते हैं।
इस सारे सिस्टम को तोड़ते हुए केंद्र एनजेएसी लाया था जो कि भारत के मुख्य न्यायाधीश समेत सुप्रीम कोर्ट के 6 सदस्यों को दरकिनार कर देगा, एनजेएसी में यह काम केंद्रीय कानून मंत्री और दो प्रख्यात मंत्री करेंगे जिनका कार्यकाल तीन-तीन साल का होगा।
इन दो मंत्रियों को को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष द्वारा मनोनीत किया जाएगा।