नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को पूर्व में जारी किए गए दिशा निर्देशों के अनुरूप तेजाब हमले के पीडि़तों के लिए मुआवजा, पुनर्वास और निशुल्क चिकित्सा की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति एम वाई इकबाल और न्यायमूर्ति सी नगप्पन की एक पीठ ने बिहार की तेजाब हमले की एक पीडि़ता के मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने बिहार सरकार से पीडि़ता को दस लाख रपए का मुआवजा देने और सर्जरी सहित उसे निशुल्क इलाज उपलब्ध कराने के लिए कहा। पीठ ने साथ ही राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों से इस तरह के पीडि़तों की हर तरह की मदद उपलब्ध कराने को कहा जैसा पूर्व के एक फैसले में भी कहा गया था।
न्यायालय ने यह सब बिहार के एनजीओ परिवर्तन केंद्र की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा। याचिका में निजी अस्पतालों पर पीडि़तों का निशुल्क उपचार न करने का आरोप लगाते हुए न्यायालय से तेजाब हमले के पीडि़तों के पुनर्वास के लिए निर्देश जारी करने की मांग की गयी है। इससे पहले न्यायालय ने देश के सभी निजी अस्पतालों को तेजाब हमले के पीडि़तों की मदद के लिए निर्देश जारी किए थे, जिनमैं दवा और महंगी सर्जरी समेत निशुल्क इलाज करना शामिल हैं।
न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों से निजी अस्पतालों के सामने विषय उठाने के लिए कहा था ताकि तेजाब हमले के पीडि़तों के लिए तत्काल और उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके। न्यायालय के निर्देश के अनुसार तेजाब हमले के पीडि़त जिन अस्पतालों में पहुंचते हैं उन्हें उक्त इंसान को तेजाब हमले का पीडि़त घोषित करने के लिए एक प्रमाणपत्र या दस्तावेज देना होगा जो उसे सर्जरी सहित तमाम निशुल्क उपचार प्रदान करने की व्यवस्था करेगा।
देश में तेजाब की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों से तेजाब की अनियंत्रित बिक्री रोकने के लिए उसे एक अनुसूचित पदार्थ के तौर पर अधिसूचित करने के लिए कहा था।