नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सीबीआई (CBI) चीफ रंजीत सिन्हा के कोयला घोटाले के आरोपियों से मिलने को गलत ठहराते हुए कहा कि, मामले की जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने सीवीसी (CVV) से पूछा कि, रंजीत सिन्हा के खिलाफ किस तरह की जांच कराई जा सकती है।
रंजीत सिन्हा ने देश के दो सबसे बड़े घोटालों - मोबाइल नेटवर्क लाइसेंसों तथा कोयला ब्लॉकों के आवंटन - में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से अपने घर पर मुलाकातें की थीं।
सिन्हा पर आरोप है कि उन्होने पद पर रहते हुए न केवल कोयला घोटाले से जुड़े आरोपियों से मुलाकात की, बल्कि उनके साथ जांच से जुड़ी जानकारियां भी साझा कीं।
पूर्व आप नेता और जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने बीते साल सीबीआईडायरेक्टर रंजीत सिन्हा पर पद का दुरुपयोग करते हुए कई प्रभावशाली लोगों को 2जी और कोयला घोटाले में बचाने का आरोप लगाया था।
उन्होंने कोर्ट में रंजीत सिन्हा के घर 2 जनपथ की विजिटर्स डायरी जमा की थी। इस डायरी के मुताबिक अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस टेलिकॉम के दो बड़े अधिकारी 15 महीने में 50 बार रंजीत सिन्हा के घर गए।
साल 2014 में इंन कंपनियों के अधिकारी कम से कम 27 बार सीबीआई निदेशक के घर गए थे। इन अधिकारियों ने आने-जाने के लिए जिस कार का इस्तेमाल किया, वह भी अनिल अंबानी की कंपनी की थी। अनिल अंबानी की कंपनी 2 जी घोटाले में आरोपी है और सीबीआई इस घोटाले की जांच कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर रंजीत सिन्हा ने कहा था कि वह इस बात से इनकार नहीं करते कि कोलगेट या 2जी मामले के आरोपियों से नहीं मिले, लेकिन प्रशांत भूषण के ये आरोप गलत हैं कि उन्होंने किसी तरह की मदद पहुंचाई। सिन्हा के वकील का कहना था कि सुपरवाइजरी ऑफिसर के तौर पर सिन्हा आरोपियों से मिल सकते थे, लेकिन उन्होंने किसी भी आरोपी का फेवर नहीं किया।
अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि सिन्हा ने अपने पद का दुरुपयोग तो नहीं किया।