नई दिल्ली: 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट में फांसी की सजा याचिका पर टाइगर मेमन के भाई याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन के पास अपनी फांसी के खिलाफ बस अब एक आखिरी मौका बचा है। मेमन की क्यूरेटिव पेटिशन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कर उसकी किस्मत का फैसला करेगा। चीफ जस्टिस एच.एल. दत्तू, जस्टिस टी.एस. ठाकुर और जस्टिस ए.आर. दवे की बेंच के पास है। ये बेंच चेंबर में दोपहर 1.40 बजे क्यूरेटिव पेटिशन पर विचार करेगी। अगर सुप्रीम कोर्ट इसे भी खारिज कर देता है तो मेमन के लिए राहत के सारे दरवाजे बंद हो जाएंगे।
इससे पहले 9 अप्रैल को पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी बरकरार रखी थी, इसके साथ ही उसकी फांसी पर लगी रोक भी हट गई थी। मेमन ने फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदलने की मांग की थी।
याकूब के वकीलों की दलील थी कि वो सिर्फ धमाकों की साजिश में शामिल था न कि धमाकों को अंजाम देने में।
याकूब की याचिका खारिज होने के साथ ही उसे कभी भी फांसी देने का रास्ता साफ हो गया था क्योंकि पिछले साल राष्ट्रपति उसकी दया याचिका खारिज कर चुके हैं। इससे पहले 21 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट स्पेशल कोर्ट के फांसी की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुना चुका है।