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‘भारत असहिष्णु नहीं, यहां की सरकार निष्पक्ष और धर्मनिरपेक्ष है’

 Written By: Bhasha
 Published : Feb 15, 2016 08:55 am IST,  Updated : Feb 15, 2016 08:55 am IST

जानीमानी बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन का मानना है कि गोमांस खाने के लिए लोगों की हत्या असहिष्णुता नहीं बल्कि एक जघन्य अपराध है और इस पर रोक लगनी चाहिए।

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तिरूवनंतपुरम: जानीमानी बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन का मानना है कि गोमांस खाने के लिए लोगों की हत्या असहिष्णुता नहीं बल्कि एक जघन्य अपराध है और इस पर रोक लगनी चाहिए। तसलीमा ने कहा, ऐसा नहीं है कि यहां अचानक असहिष्णुता शुरू हो गई है....एक देश के तौर पर भारत असहिष्णु नहीं है क्योंकि भारत में संविधान और कानून है जो असहिष्णुता का समर्थन नहीं करता। कुछ लोग हर जगह असहिष्णु होते हैं...सख्त कानूनों के चलते आप असहिष्णुता का आचरण नहीं कर सकते। यहां बड़ी संख्या में धर्मनिरपेक्षतावादियों ने असहिष्णुता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, यह एक अच्छा संकेत है। हाल में कोझीकोड साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए केरल आयी तसलीमा ने एक मलयाली टेलीविजन चैनल से कहा, गोमांस खाने के लिए लोगों की हत्या करना असहिष्णुता नहीं बल्कि जघन्य अपराध है। इसे रोका जाना चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह भारत की नागरिक होना चाहती हैं, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में हैं, तसलीमा ने कहा कि उनका मानना है कि भारत सरकार निष्पक्ष और धर्मनिरपेक्ष है। उन्होंने कहा कि उन्हें और प्रसन्नता होगी यदि भारत सरकार उन्हें एक निवास की अनुमति दे दे। मुझे यदि भारत में निवास की अनुमति दी जाती है तो मैं और प्रसन्न होउंगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का हाल में पाकिस्तानी गायक अदनान सामी को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का निर्णय एक अच्छा संकेत है। तसलीमा ने कहा कि पाकिस्तान को बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर को कराची साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए वीजा देने से इनकार नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यद्यपि इस मुद्दे पर पाकिस्तान के यूटर्न के बाद खेर को भी जाना चाहिए था। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की कई वर्ष पहले पाकिस्तान यात्रा का उल्लेख करते हुए दावा किया वह :आडवाणी: धर्मनिरपेक्ष और एक बेहतर व्यक्ति बन गए। ऐसे बहुत से लोग हैं जो भारत से प्रेम करते हैं, सभी भारत विरोधी, हिंदू विरोधी या कट्टरपंथी नहीं।

यूरोप, अमेरिका और भारत में अपने 21 वर्ष के निर्वासन पर उन्होंने कहा कि जब वह यूरोप में रह रही थीं उन्हें बाहरी जैसा महसूस होता था जैसे वह उनका देश नहीं हो और वह हमेशा बांग्लादेश जाने के लिए तरसती रहती थीं। तसलीमा ने कहा कि यद्यपि चूंकि उन्हें अपने देश लौटने नहीं दिया गया उन्होंने फैसला किया कि भारत एक बेहतर स्थान है क्योंकि पश्चिम बंगाल में लोग उनसे प्यार करते हैं, उनकी पुस्तकें प्रकाशित हो जाती हैं और उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं। यद्यपि जब हैदराबाद में कट्टरपंथियों ने उन पर हमला किया पश्चिम बंगाल की तत्कालीन वामपंथी सरकार ने उनका समर्थन नहीं किया और उन्हें राज्य छोड़ने के लिए कह दिया जहां वह घर में नजरबंद थीं। उन्होंने कहा, लोगों ने कहा कि यह मुस्लिम कट्टरपंथियों के तुष्टिकरण के लिए किया गया था कि मुझे जाने के लिए कहा गया। लेखिका ने कहा कि चूंकि राजस्थान में भी उनकी जरूरत नहीं थी, तत्कालीन संप्रग सरकार ने उनसे भारत छोड़ने के लिए कह दिया, साथ ही यह वादा भी किया कि उनके लिए यूरोप में सब कुछ किया जाएगा। 52 वर्षीय लेखिका का वीजा गत वर्ष अगस्त में एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया था।

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार पर कोई राजनीतिक दबाव था कि उनसे भारत छोड़ने के लिए कहा गया, तसलीमा ने कहा कि वह धर्मनिरपेक्षता, महिलाओं के अधिकार, मानवाधिकार और मानवतावाद पर लिखती हंै। उन्होंने कहा, इसलिए मैं मानती हूं कि राजनीतिक पार्टियों को मेरी लेखनी पर आपत्ति नहीं करनी चाहिए। मैं धार्मिक कट्टरपंथियों के खिलाफ हूं...केवल मुस्लिम कट्टरपंथी ही नहीं बल्कि सभी तरह के कट्टरपंथियों के खिलाफ। तसलीमा स्वीडन की नागरिक हैं जिन्हें 2004 के बाद से लगातार भारत में रहने का वीजा मिल रहा है। उन्होंने कहा, मैं भारत छोड़कर नहीं जाना चाहती थी। मैं ऐसे देश में रहना चाहती थीं जहां के लोग मेरी भाषा बोलते हैं। मेरे लिए ऐसे देश में रहना बहुत महत्वपूर्ण था जहां लोग मेरी भाषा बोलते हैं। बेंगलुरू में हाल मैं एक तंजानियाई छात्रा पर हुए हमले के बारे में उन्होंने कहा, उप महाद्वीप में लोग नस्ली हैं। मेरा मानना है कि भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में लोग अश्वेत से घृणा करते हैं। उपन्यास लज्जा की लेखिका तसलीमा ने कहा कि बांग्लादेश के जो ब्लागर मित्र उनका समर्थन करते थे उनकी हत्या कर दी गई है। वे सभी मेरा समर्थन करते थे। अब वे नहीं रहे...कट्टरपंथियों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी।

उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में कई लोगों का ध्यान इस पर नहीं गया कि बांग्लादेश में इस्लामीकरण जड़े जमा रहा है। जो मैं कह रही थी उनका उसमें विश्वास नहीं था। उस समय मैं जो भी चाहती थी वह समाचार पत्रों में लिख सकती थी, मैं इस्लाम की आलोचना कर सकती थी। अब ये असंभव है। उन्होंने भारत को एक खूबसूरत देश बताया जहां कई रिवाज, धर्म, संस्कृति और भाषाओं का सह अस्तित्व है। उन्होंने कहा, कभी कभी घटनाएं होती हैं लेकिन यह एक शांतिपूर्ण देश है। यह अद्भुत है। मैं उम्मीद करती हूं कि पड़ोसी देश भारत से सीखेंगे और वास्तव में लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष देश बनने का प्रयास करेंगे।

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