
क्या है प्रोजेक्ट
इस रूट के लिए 12 स्टेशनों को तैयार किया जाएगा। भारत 10 हजार किलोमीटर के हाई-स्पीड रूट प्लान कर रहा है। इसके लिए भारत को जापान से 30 फीसदी इक्विपमेंट खरीदने पड़ेंगे। इसमें टोक्यो में निर्मित कोच भी होंगे। इस काम के लिए जापान भारत को 50 साल के लिए1 फीसदी से भी कम की दर पर लोन देगा। जापान इस प्रोजेक्ट के लिए भारत की 81 फीसदी कॉस्टका वहन करेगा। इस प्रोजेक्ट को 2017 में शुरू किया जाएगा और 2023 तक इसके समाप्ति की उम्मीद है। अगर यह प्रजेक्ट सफल हो जाएगा तो इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसके कार्य को नई दिल्ली तक बढ़ाया जाएगा। इस ट्रेन में 40 हजार लोग रोजाना सफर कर सकते हैं।
इस रूट में 11 टनल बनाए जाएंगे। एक मुंबई में समुद्र के भीतर होगा। इसके अलावा मुंबई-अहमदाबाद रूट में 318 किलोमीटर के बांध, 162 किमी पुल और 27.01 किलोमीटर की 11 सुरंगें बनेगी। इस लाइन में कुल 12 स्टेशन होंगे जिनमें यह ट्रेन सूरत और वड़ोदरा में दो-दो मिनट के लिए रूकेगी। गौरतलब है कि पहली बुलेट ट्रेन जापान में ही बनी थी। जिसके लिए नई ट्रंक लाइने बनाई गई थी। यह ट्रेन टोक्यो से शिन ओसाका जाने के लिए 2 घंटे 22 मिनट का समय लेती है।