नई दिल्ली: बाघ का नाम सुनते ही आंखों के सामने एक खतरनाक नरभक्षी का खौफनाक चेहरा घूम जाता है। लेकिन वरिष्ठ कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी के कार्टून्स को देखने के बाद बाघों के प्रति आपकी यह डरावनी धारणा बदल सकती है। उनके कार्टून्स का एग्जिविशन 'द टाइगर स्पीक' आईटीओ स्थित प्यारेलाल भवन में 3-5 मार्च तक आयोजित है। इसका उद्घाटन भारतीय खान एवं इस्पात मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया।
हरिओम तिवारी ने अपने कार्टून्स में बाघों की कई समस्याओं को चित्रित किया है। ये कार्टून्स खूब हंसाते भी है और सोचने के लिए मजबूर करते हैं। इन कार्टून्स में बाघ कई कैरेक्टर में सामने आते हैं। इनमें गलियों, दुकानों में भीख मांगते बाघ हैं तो कुछ बाघ शहर में किराए का मकान खोज रहे हैं। एक बाघ होटलवाले से कह रहा है कि वह शाकाहारी हो गया है, उसे एक वेज थाली चाहिए।
भारत में लुप्त होते बाघों को बचाने की कोशिश कई सालों से की जा रही है। कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी का कहना है कि मीडिया में अक्सर खबरें आती रहती हैं बाघ रिहाइशी इलाकों में घुस आते हैं। जंगल खत्म होने की वजह से बाघों के सामने आवास, भोजन सहित कई समस्याएं हैं। इन्हीं समस्याओं ने मुझे बाघों पर काम करने को प्रेरित किया। बाघ अपनी बात कह नहीं पाते तो मुझे लगा कार्टूनों के माध्यम से इन बेजुबानों की समस्याओं को सामने लाना चाहिए। मशहूर कार्टूनिस्ट स्वर्गीय आर के लक्ष्मण से कार्टूनिंग का गुर सीखने वाले हरिओम तिवारी देश के कई अखबारों और पत्रिकाओं से जुड़े रहे हैं। अागे देखें VIDEO